इटावा औरैया, अगस्त 1 -- जसवंतनगर। खाटूश्याम मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण के अंतिम दिवस पर वृंदावन से पधारे कथाव्यास ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सच्ची मित्रता कभी धन-दौलत की मोहताज नहीं होती, बल्कि प्रेम, समर्पण और निष्कपट भाव ही उसका वास्तविक आधार हैं। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने निर्धन मित्र सुदामा का जिस आत्मीयता और सम्मान से स्वागत किया, वह मानव जीवन को प्रेम, विनम्रता और सेवा का संदेश देता है। कथा में राजा परीक्षित की भूमिका मंदिर के महंत सुनील उनकी पत्नी सोनी देवी निभा रहे हैं।

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