वाराणसी , जुलाई 25 -- ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज गौमाता की रक्षा के उद्देश्य से गोरखपुर से प्रारंभ हुई उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर निकली 81 दिवसीय गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा पूर्ण करने तथा लखनऊ में आयोजित गौगर्जना महासभा में आगामी गौरक्षा आंदोलन की रूपरेखा की घोषणा के बाद शनिवार को काशी पहुंचे।

काशी आगमन पर संतों, श्रद्धालुओं एवं भक्तों ने पुष्पवर्षा और जयघोष के साथ शंकराचार्य का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। श्रद्धालुओं के आग्रह पर वह पालकी में सवार होकर हरिश्चंद्र घाट मार्ग से होते हुए श्रीविद्यामठ पहुंचे। श्रीविद्यामठ में मठ के प्रभारी ब्रह्मचारी परमात्मानंद ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शंकराचार्य का आरती-पूजन किया। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया।

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि शंकराचार्य 24 से 27 जुलाई तक काशी प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान उनके पावन सान्निध्य में विभिन्न आध्यात्मिक एवं मांगलिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 27 जुलाई की सायंकाल संतों एवं श्रद्धालुओं द्वारा शंकराचार्य के चरण पादुका पूजन, वंदन एवं अभिनंदन का कार्यक्रम आयोजित होगा।

उन्होंने बताया कि शंकराचार्य 28 जुलाई को छत्तीसगढ़ के बेमेतरा स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां वह दो माह तक चातुर्मास व्रत एवं अनुष्ठान संपन्न करेंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शंकराचार्य काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। ऐसे में गुरु पूर्णिमा से पूर्व उनके चरण पादुका पूजन, वंदन एवं अभिनंदन का अवसर मिलने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।

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