लखनऊ , मार्च 20 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बीते नौ वर्षों में निवेश और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन दर्ज किया है। सुनियोजित रणनीति और दूरदर्शी नेतृत्व के चलते प्रदेश अब देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक निवेशकों के लिए भी एक प्रमुख गंतव्य बनकर उभरा है।
सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, राज्य सरकार की 'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' नीति ने उत्तर प्रदेश को नई पहचान दी है। इसके तहत पहले व्यवस्थागत सुधार (रिफॉर्म) किए गए, फिर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू (परफॉर्म) किया गया और अंततः व्यापक बदलाव (ट्रांसफॉर्म) के जरिए प्रदेश की छवि को नई ऊंचाई दी गई।
इसी रणनीति का परिणाम है कि अब तक आयोजित चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के माध्यम से करीब Rs.15 लाख करोड़ की परियोजनाएं धरातल पर उतारी जा चुकी हैं। वहीं, अब Rs.7.5 लाख करोड़ की नई परियोजनाओं के साथ पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी जोरों पर है।
वर्ष 2017 से पहले निवेश के मामले में पिछड़े रहे उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने बिंदुवार सुधार लागू किए। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए 13 अधिनियमों में संशोधन कर 99% छोटे आपराधिक प्रावधान समाप्त किए गए, जिससे उद्योगों के लिए वातावरण अधिक अनुकूल बना।
सरकार ने निवेश के लिए मजबूत आधार तैयार करने के उद्देश्य से एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया। साथ ही, उद्योगों के लिए 'प्लग-एंड-प्ले' सुविधाएं और डि-रेगुलेशन जैसे सुधार लागू किए गए, जिससे निवेश प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनी। प्रदेश को अब तक 50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
इसके अलावा, सेक्टर आधारित औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान देते हुए फिल्म सिटी, टॉय पार्क, लॉजिस्टिक हब (यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र), फार्मा पार्क (झांसी-ललितपुर), मेगा टेक्सटाइल पार्क (लखनऊ-हरदोई), परफ्यूम पार्क (कन्नौज) और गोरखपुर, कानपुर, हरदोई में प्लास्टिक, गारमेंट व लेदर क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।
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