चंडीगढ़ , अगस्त 07 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने पंजाब विधानसभा की सार्वजनिक उपक्रम समिति की 129वीं रिपोर्ट को मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के नशा विरोधी अभियान की वास्तविक स्थिति उजागर करने वाला दस्तावेज बताया है।
उन्होंने कहा कि सरकार के विज्ञापन कुछ और कहानी बयां करते हैं, जबकि विधानसभा की अपनी रिपोर्ट नशे की समस्या की गंभीर तस्वीर सामने रखती है।
श्री कैंथ ने शुक्रवार को कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में यदि सरकार को 5.648 अरब (564.8 करोड़) बुप्रेनॉर्फिन टैबलेट वितरित करनी पड़ी हैं और करीब 3.17 लाख मरीज, जिनमें अधिकांश युवा हैं, अब भी दवा पर निर्भर हैं, तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य में नशा आखिर कितना खत्म हुआ है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जेलों में बुप्रेनॉर्फिन टैबलेट की आपूर्ति भी 11.7 करोड़ से बढ़कर 88.7 करोड़ टैबलेट हो गयी है। उनके अनुसार यह स्थिति सरकार के नशामुक्त पंजाब और 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
श्री कैंथ ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार नशे के खिलाफ लड़ाई में जीत के दावे कर रही है, जबकि विधानसभा समिति की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि नशे का संकट अभी भी गहराई से मौजूद है। उन्होंने कहा कि सरकार यह स्पष्ट करने में विफल रही है कि कितने युवा पूरी तरह नशामुक्त हुए, कितने सामान्य जीवन में वापस लौटे और कितने अभी भी दवा आधारित उपचार पर निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक खुलासा यह है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी विधानसभा समिति के समक्ष यह स्पष्ट नहीं कर सके कि बुप्रेनॉर्फिन टैबलेट अवैध नशामुक्ति केंद्रों तक कैसे पहुंच रही हैं। श्री कैंथ के अनुसार इससे संकेत मिलता है कि सरकार दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला और नशामुक्ति दवाओं के आसपास सक्रिय अवैध नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पायी है।
श्री कैंथ ने कहा कि 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान महज प्रचार अभियान बनकर रह गया है। यदि सरकार वास्तव में नशे के खिलाफ सफल होती तो पंजाब में अरबों बुप्रेनॉर्फिन टैबलेट की आवश्यकता नहीं पड़ती और जेलों में इन दवाओं की मांग कई गुना नहीं बढ़ती। उन्होंने पंजाब सरकार से तत्काल श्वेत पत्र जारी कर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने सरकार से पूछा कि 5.648 अरब बुप्रेनॉर्फिन टैबलेट वितरित करने के बाद कितने मरीज पूरी तरह नशामुक्त हुए हैं, कितने अब भी बुप्रेनॉर्फिन पर निर्भर हैं और उपचार के बाद मरीजों के दोबारा नशे की चपेट में आने की वास्तविक दर क्या है।
श्री कैंथ ने यह भी सवाल उठाया कि पंजाब की जेलों में बुप्रेनॉर्फिन की मांग सात गुना से अधिक क्यों बढ़ी है तथा अवैध नशामुक्ति केंद्रों तक ये टैबलेट कौन पहुंचा रहा है और उन्हें किसके संरक्षण में संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, " पंजाब की जनता अब इस सरकार का आकलन विज्ञापनों से नहीं, बल्कि वास्तविक और मापने योग्य परिणामों से करेगी। नशामुक्त पंजाब का अर्थ एक निर्भरता को दूसरी निर्भरता से बदलना नहीं हो सकता। सरकार को राजनीतिक प्रचार से आगे बढ़कर वास्तविक पुनर्वास, पूर्ण नशामुक्ति और पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने चाहिए।"श्री कैंथ ने कहा कि पंजाब की एक पूरी पीढ़ी के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार को जवाबदेही तय करनी होगी।
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