लखनऊ , जुलाई 25 -- उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने प्रदेश में करीब 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं के स्वीकृत विद्युत भार में किए गए बदलाव, स्मार्ट मीटर आधारित प्रक्रियाओं और नेट मीटरिंग से जुड़ी समस्याओं को लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखा है।
उन्होंने इन मामलों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और प्रभावी जांच कराते हुए उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक अंतरिम और अंतिम नियामकीय निर्देश जारी करने की मांग की है। श्री राय ने कहा कि बड़ी संख्या में बिजली उपभोक्ताओं के स्वीकृत विद्युत भार में परिवर्तन किए जाने से उन पर अतिरिक्त स्थायी प्रभार, सुरक्षा जमा और अन्य वित्तीय देनदारियों का बोझ पड़ा है।
उनका आरोप है कि वितरण कंपनियां इन प्रक्रियाओं के माध्यम से उपभोक्ताओं से आर्थिक वसूली कर रही हैं। यदि इन प्रक्रियाओं का स्वतंत्र परीक्षण नहीं कराया गया तो उपभोक्ताओं के आर्थिक और वैधानिक अधिकार प्रभावित होते रहेंगे। उन्होंने पत्र में कहा कि यह समस्या केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग, व्यापार, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, डॉक्टरों, इंजीनियरों, पत्रकारों, अधिवक्ताओं, सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारियों, लघु उद्यमियों, सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों तथा स्वयं बिजली विभाग के कर्मचारियों को भी प्रभावित कर रही है।
श्री राय का कहना है कि इन वर्गों में से कई बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं, लेकिन अंततः इसका सबसे अधिक असर गरीब, निम्न और मध्यम आय वर्ग पर पड़ेगा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आयोग से स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली, एल्गोरिद्मिक निर्णय प्रक्रिया और विद्युत भार निर्धारण के आधारों की स्वतंत्र तकनीकी, वित्तीय और नियामकीय जांच कराने की मांग की है।
साथ ही उन्होंने कहा है कि नेट मीटरिंग व्यवस्था की कमियों को दूर करने और जिन उपभोक्ताओं से विधिसम्मत प्रक्रिया के बिना अतिरिक्त धनराशि वसूली गई है, उन्हें राहत देने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। श्री राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग विद्युत अधिनियम के तहत गठित एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है, जिसका दायित्व उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और वितरण कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने आयोग से इस पूरे मामले में शीघ्र, पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की।
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