जयपुर , अक्टूबर 05 -- राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार को नव-प्रशिक्षित कांस्टेबल के बैच-102 का दीक्षांत परेड समारोह हुआ।
पुलिस अकादमी में आयोजित दीक्षांत परेड समारोह में 438 महिला कांस्टेबलों ने जनसेवा की शपथ ली। मार्च पास्ट के दौरान मंच के सामने से गुजरती नारी शक्ति का दर्शक दीर्घा में बैठे परिजनों ने स्वागत किया, वहीं पुलिसकर्मियों ने सैल्यूट कर अभिवादन किया।
समारोह में परेड कमांडर प्रियंका बेनीवाल ने नेतृत्व में मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने परेड का निरीक्षण किया। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एडीजीपी एवं आरपीए निदेशक संजीब कुमार नार्ज़ारी ने नव प्रशिक्षित कॉन्स्टेबलों को शपथ दिलाई।
श्री शर्मा ने नव प्रशिक्षितों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पुलिस वर्दी को एक फोर्स ही नहीं, समाज और राष्ट्र के प्रति सच्ची सेवा के रूप में देखें। दीक्षांत समारोह प्रशिक्षण का अंत नहीं है। यह देश और जनता के प्रति सेवा, समर्पण, अनुशासन और उत्तरदायित्व की एक नयी शुरुआत है। यह गौरवपूर्ण क्षण प्रशिक्षितों के माता-पिता और परिजनों के त्याग, प्रोत्साहन और आशीर्वाद के बिना संभव नहीं हो सकता था।
उन्होंने कहा कि इन कांस्टेबलों को गृह मंत्रालय के नये 'मॉडल सिलेबस' के अनुरूप प्रशिक्षण दिया गया है। नये सिलेबस का मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों को आमजन की अपेक्षाओं के अनुरूप अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाना है। उन्होंने पुलिसकर्मियों से कहा कि वे नये आपराधिक कानूनों का गहन अध्ययन करें। दैनिक कार्यशैली में डिजिटल साक्ष्यों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें, जिससे अनुसंधान में तेजी आए और मामलों के त्वरित निस्तारण में मदद मिले। उन्होंने कहा कि बेहतर पुलिसिंग के परिणामस्वरूप गंभीर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने में सफलता मिली है। नशा सामग्री तस्करी, पेपरलीक और संगठित अपराधों जैसे मामलों में पुलिस लगातार बड़ी कार्रवाई कर रही है।
श्री शर्मा ने कहा कि वर्तमान में मादक पदार्थों की तस्करी, सीमा पार से ड्रोन के जरिए तस्करी, अवैध हथियारों की तस्करी, संगठित अपराध तथा सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहें, फर्जी खबरें एवं डीपफेक जैसी चुनौतियां पुलिस के सामने हैं। इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जनता का विश्वास पुलिस की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने 'कालिका यूनिट' की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस बल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से कानून व्यवस्था, आसूचना संग्रहण और सामुदायिक पुलिसिंग को नयी मजबूती मिली है। महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं और बच्चों में पुलिस के प्रति गहरा विश्वास बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि पुलिस थानों को कार्यालय न समझते हुए एक 'सेवा केंद्र' की तरह विकसित किया जाये। यहां नागरिकों का सम्मान हो उनकी शिकायतें पूरी संवेदनशीलता के साथ सुनी जाएं। बुजुर्गों, दिव्यांगों, गरीबों और महिलाओं को प्राथमिकता मिले। पीड़ितों को उनकी शिकायतों पर हुई कार्रवाई की प्रगति से समय-समय पर अवगत कराया जाये। उन्होंने कहा कि महिला पुलिसकर्मी दृढ़ता, आत्मविश्वास और व्यावसायिक दक्षता के साथ हर चुनौती का सामना करेंगी। उन्होंने व्यायाम की आदत को हमेशा जारी रखने के लिए कहा।
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