रायपुर , सितंबर 12 -- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी प्रदेश को दिलाने के लिए शासन स्तर पर आवश्यक प्रयास करेगी। इसके साथ ही प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विस्तार और दूरस्थ तथा वनांचल क्षेत्रों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए संसाधनों और अवसरों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
श्री साय ने राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित न्यू सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की कार्यकारिणी समिति एवं सामान्य परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के गांवों, वनांचलों और दूरस्थ क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। जरूरत उनकी समय पर पहचान कर बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की है।
उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता और पदक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं। राज्य सरकार खेल अधोसंरचना के विकास के साथ प्रशिक्षण और प्रतिभा चयन की व्यवस्था को भी मजबूत कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में खेल परिसर का निर्माण किया जा रहा है। रायपुर में लगभग 60 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक तीरदांजी अकादमी का निर्माण भी किया जा रहा है। इन सुविधाओं से खिलाड़ियों को आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ प्रशिक्षकों और आवश्यक संसाधनों के साथ उच्च स्तरीय प्रशिक्षण तथा अभ्यास की सुविधा मिलेगी।
उन्होंने जशपुर अंचल में तीरंदाजी की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा समुदाय में यह खेल जीवन और परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। जशपुर के पंडरापाठ में लगभग 20 से 25 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी की स्थापना की जा रही है। इससे जशपुर सहित आसपास के वनांचल के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण मिल सकेगा।
श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ और राज्य शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को विशेष रूप से संघ के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे खेल संघों की आवश्यकताओं और विभिन्न प्रस्तावों पर शासन स्तर पर प्रभावी समन्वय तथा खेलों से जुड़े विषयों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न खेल संघों को उद्योग समूहों से जोड़ने की पहल तेज करने पर जोर देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में अनेक बड़े उद्योग समूह कार्यरत हैं। इनके सहयोग को खेलों से जोड़ने पर खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों, प्रतियोगिताओं के आयोजन और खेल अधोसंरचना के विस्तार के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने उद्योग जगत और खेल गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय के सकारात्मक परिणामों को करीब से देखा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा जैसे अंचलों में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं। बस्तर ओलंपिक ने दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों युवाओं को प्रतिभा प्रदर्शन का बड़ा मंच दिया है और राज्य सरकार इसका आयोजन प्रत्येक वर्ष करेगी। सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी क्षेत्र की प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिल रहा है।
श्री साय ने कहा कि बस्तर में शांति और विकास के नए वातावरण के बीच खेलों को भी नई गति देने का समय है। खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से प्रदेश की प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि बड़े शहरों के साथ दूरस्थ गांवों और वनांचलों के खिलाड़ियों को भी समान अवसर मिलें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों और खिलाड़ियों को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिला है। छत्तीसगढ़ में भी खेल अलंकरण समारोह की पुनः शुरुआत की गई है। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मान और आवश्यक आर्थिक सहायता देने के साथ खेल प्रतिभाओं को शासकीय सेवा में अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
बैठक में 40वें नेशनल गेम्स के आयोजन पर हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ बड़े राष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ने का समय है। यदि नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिलती है तो इसके आयोजनों को बस्तर से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। इससे बस्तर और छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने के साथ स्थानीय युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना के निर्माण और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बजट में आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं। लंबे अंतराल के बाद खेल अलंकरण समारोह आयोजित होने से खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के वनांचलों में तीरंदाजी जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है तथा बस्तर के जनजातीय युवा मलखम्ब में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। सामूहिक खेलों के साथ व्यक्तिगत खेलों में खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने की जरूरत है।
सांसद विजय बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल गतिविधियों का तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने खेल अलंकरण की पुनः शुरुआत, उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में अवसर देने और खेल संबंधी विषयों में बेहतर समन्वय के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी दिए जाने की पहल का स्वागत किया।
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया ने पिछली बैठक का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए खेल उपलब्धियों, संघ की गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। बैठक में 23 जून को ओलंपिक दिवस के आयोजन, विभिन्न खेल गतिविधियों, नेशनल गेम्स, खेल संघों की आवश्यकताओं और आगामी गतिविधियों के लिए जरूरी बजटीय प्रावधानों के साथ संघ की आय-व्यय पर चर्चा हुई।
प्रदेश में वर्तमान जिला ओलंपिक संघों के अतिरिक्त अन्य जिलों में भी जिला ओलंपिक संघ गठित करने के लिए समिति बनाए जाने पर सहमति दी गई। हैंडबॉल एसोसिएशन सहित विभिन्न खेल संघों से जुड़े विषयों और प्रदेश में खेल गतिविधियों के विस्तार पर भी विचार-विमर्श किया गया।
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