राजनांदगांव , अप्रैल 10 -- छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस धान को किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटलकी ऊंची दर पर खरीदा था, अब उसे संग्रहण केंद्रों में रखे-रखे खराब होने से बचाने के लिए औने-पौने दामोंपर बेचने की तैयारी की है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राजनांदगांव जिले के संग्रहण केंद्रों में लगभग नौ लाख क्विंटल अतिरिक्त धान जमा है। इस धान को निकालने के लिए सरकार ने ऑनलाइन नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए आधार मूल्य बेहद कम रखा गया है। अब तक लगभग नौ राइस मिलर्स ने इस नीलामी में रुचि दिखाते हुए ऑनलाइन आवेदन जमा कर दिये हैं। जानकारों का कहना है कि सरकार को केवल खरीद मूल्य और विक्रय मूल्य के अंतर से ही घाटा नहीं हो रहा है, बल्कि संग्रहण और परिवहन पर भी भारी खर्च हो चुका है।
धान को खेतों से संग्रहण केंद्रों तक लाने में करोड़ों रुपये का परिवहन शुल्क चुकाया गया है। केंद्रों की देखरेख और सुरक्षा पर भी सरकार ने मोटी राशि खर्च की है। 3100 प्रति क्विंटल खरीदे गये धान को औसतन 2000 रुपये में बेचने पर सरकार को प्रति क्विंटल सीधे तौर पर 1100 रुपये का घाटा हो रहा है।
मार्कफेड के अधिकारियों के अनुसार, नीलामी की पूरी प्रक्रिया रायपुर मुख्यालय के माध्यम से ऑनलाइन संचालित की जा रही है। मिलर्स द्वारा आवेदन जमा करने के बाद, नीलामी की प्रक्रिया पूरी होते ही डिलीवरी ऑर्डर जारी किये जाएंगे। इसके बाद ही मिलर्स सीधे संग्रहण केंद्रों से धान का उठाव शुरू कर सकेंगे।
राजनांदगांव जिले में इस सीजन में रिकॉर्ड धान खरीदी हुई थी, लगभग 55.81 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी, जिसमें से अब तक 57 लाख क्विंटल धान का उठाव हो चुका है। वर्तमान में संग्रहण केंद्रों में लगभग 70 हजार क्विंटल और मिलिंग के बाद अतिरिक्त पांच लाख क्विंटल धान शेष है।
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