रायपुर , मार्च 31 -- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित प्रेस क्लब भवन में आयोजित "हमर पहुँना" कार्यक्रम में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि 31 मार्च 2026 राज्य के लिए ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि सशस्त्र नक्सलवाद का अंत हो चुका है। उन्होंने कहा कि इसी दिन से "हमर पहुँना" कार्यक्रम की शुरुआत भी हुई है और वे इसके पहले अतिथि हैं, जिससे यह दिन और भी विशेष बन गया है।

कार्यक्रम के पूर्व पत्रकारों को बस्तर में नक्सल हिंसा पर आधारित एक मार्मिक शॉर्ट फिल्म दिखाई गई, जिसमें नक्सली आतंक से प्रभावित आदिवासी परिवारों के दर्द और संघर्ष को दर्शाया गया।

पत्रकारों से चर्चा में गृहमंत्री ने बताया कि दिसंबर 2023 में राज्य सरकार के गठन के बाद जनवरी 2024 में उच्चस्तरीय बैठक में देशभर में नक्सलवाद की स्थिति का आकलन किया गया, जिसमें सामने आया कि लगभग 75 प्रतिशत नक्सल प्रभाव छत्तीसगढ़ में केंद्रित है और नक्सली कैडर का 90 प्रतिशत हिस्सा भी यहीं सक्रिय है। इसके बाद केंद्रीय बलों-सीआरपीएफ, बीएसएफ सहित अन्य एजेंसियों-को समन्वित रणनीति के तहत काम करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि 24 अगस्त 2024 को हुई दूसरी बैठक में सभी एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य घोषित किया था। प्रारंभ में यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण लगा, लेकिन स्पष्ट रोडमैप और रणनीति से इसे संभव बनाया गया।

गृहमंत्री ने बताया कि सरकार ने संवाद और तकनीक दोनों का सहारा लिया। बारकोड आधारित फीडबैक प्रणाली शुरू की गई और वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों से सीधे संवाद स्थापित किया गया। इंटेलिजेंस नेटवर्क को अत्याधुनिक बनाया गया, जिससे ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों को न्यूनतम जोखिम रहा और कई अभियानों में जवानों को खरोंच तक नहीं आई।

उन्होंने कहा कि इस सफलता का श्रेय बस्तर की जनता, सुरक्षा बलों के जवानों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों, समाज प्रमुखों और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति को जाता है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं हर महीने बस्तर के विभिन्न समाजों-दोरला, माडिया, मुड़िया आदि-के साथ बैठकर संवाद करते थे, जिससे विश्वास बहाली हुई।

पुनर्वास नीति पर जोर देते हुए शर्मा ने कहा कि जगदलपुर में पहला बड़ा पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया, जहां वोकेशनल ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई। अक्टूबर 2024 में लगभग 200 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया और अब तक करीब 3000 लोग पुनर्वास की प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं, जिनमें से लगभग 1500 निरक्षर हैं।

उन्होंने बताया कि पुनर्वास की कहानियों को टीवी, रेडियो और समाचार पत्रों के माध्यम से व्यापक रूप से प्रचारित किया गया, जिससे अन्य नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिली। दूरदराज के क्षेत्रों में रेडियो का दायरा बढ़ाया गया ताकि सूचना हर व्यक्ति तक पहुंच सके।

गृहमंत्री ने कहा कि वर्तमान में नक्सली संगठन का लगभग 99 प्रतिशत ढांचा समाप्त हो चुका है। कुछ अवशेष कांकेर और दक्षिणी क्षेत्रों में छिपे हुए हैं, लेकिन वे अब किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ के कुछ नक्सली जो तेलंगाना में सक्रिय हैं, उन्हें वहीं की श्रेणी में गिना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एक वर्ष के भीतर सभी सक्रिय आईईडी को भी निष्क्रिय कर दिया जाएगा, हालांकि फिलहाल अंदरूनी क्षेत्रों में जाने वाले लोगों को सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। राज्य में लगभग 400 सुरक्षा कैंप इस दिशा में कार्य कर रहे हैं।

मानवीय पहलुओं का जिक्र करते हुए शर्मा ने बडकम सुक्की नामक युवती का उदाहरण दिया, जिसने आईईडी विस्फोट में अपना पैर गंवा दिया था और जिसका उपचार रायपुर में हुआ। उन्होंने बताया कि नक्सल हिंसा में केवल इंसान ही नहीं, बल्कि वन्यजीव भी प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि पहले बस्तर में सरपंचों की हत्या, थानों में आगजनी और वाहनों को जलाने जैसी घटनाएं आम थीं, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। लोग अब खुलकर अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं, जो पहले नक्सलियों के डर से संभव नहीं था।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने सहयोग की अपेक्षा की थी, लेकिन विपक्ष ने केवल आरोप लगाए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर कटाक्ष करते हुए झीरम मामले के कथित सबूत सार्वजनिक करने की बात कही। साथ ही, पूर्व की केंद्र सरकार के समय सुरक्षा सलाहकार समिति में नक्सल विचारधारा से जुड़े लोगों के शामिल होने और राहुल गांधी के संदर्भ में भी टिप्पणी की।

माओवाद पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि "सत्ता बंदूक की नली से निकलती है" जैसी विचारधारा भारतीय संविधान के विरुद्ध है और इसे अब समाप्त किया जा रहा है।

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