पटना , जुलाई 15 -- िहार जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने बुधवार को कहा कि नीतीश कुमार की अतिमहत्वाकांक्षी ''सात निश्चय -3'' योजना के चौथे निश्चय 'उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य' के तहत सम्राट चौधरी के कर-कमलों से राज्य के 211 प्रखंडों के नए डिग्री काॅलेजों में पठन-पाठन की शुरुआत बिहार की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला ऐतिहासिक कदम साबित होगा।श्री कुशवाहा ने आज बयान जारी कर कहा कि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इन संस्थानों की स्थापना से न केवल ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की सुगमता सुनिश्चित होगी, बल्कि इसका सर्वाधिक लाभ सूबे की बेटियों और उन युवाओं को मिलेगा, जो संसाधनों और समय के अभाव में उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक कदम से छात्र-छात्राओं के समय और संसाधन, दोनों की बचत होगी, जिससे वे अधिक से अधिक संख्या में उच्च शिक्षा से जुड़ सकेंगे।
श्री कुशवाहा ने कहा कि किसी भी प्रगतिशील और समृद्ध समाज के निर्माण की धुरी केवल और केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही है। इसी लोक-कल्याणकारी ध्येय को केंद्र में रखकर नीतीश कुमार के कुशल नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने वर्ष 2005 के बाद से ही राज्य की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था के सिस्टेमिक रिफाॅर्म्स को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। विकास के इस विज़नरी माॅडल का प्रत्यक्ष प्रमाण आँकड़ों में भी परिलक्षित होता है।
जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2005 में शिक्षा का कुल बजट मात्र 4,366 करोड़ रुपये था, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 77,690 करोड़ रुपये हो गया है, जो राज्य के कुल बजट का 22 प्रतिशत है। इसके साथ ही राज्य में विद्यालयों की संख्या 53,993 से बढ़कर 75,812 हो चुकी है और शिक्षकों की संख्या भी 2,25,000 से बढ़कर तकरीबन 6 लाख तक पहुँच चुकी है, जो बिहार के उज्ज्वल भविष्य के प्रति राजग सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।
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