चंडीगढ़ , अगस्त 10 -- हरियाणा सरकार ने प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026 के तहत 2031 तक राज्य का निर्यात दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। पांच वर्षीय रोडमैप के तहत 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक का विनिर्माण निवेश आकर्षित करने और पांच लाख से अधिक नए रोजगार सृजित करने की योजना है। इसका उद्देश्य हरियाणा को मजबूत विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करना है।

नीति के तहत बड़े औद्योगिक क्लस्टर प्लग एंड प्ले औद्योगिक एस्टेट और कॉमन फैसिलिटी सेंटर विकसित किए जाएंगे। सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत करने के साथ एमएसएमई राइट टू बिजनेस फ्रेमवर्क लागू होगा, जिससे कारोबार शुरू करने और संचालित करने की प्रक्रिया आसान होगी।

उद्योगों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए स्वचालन, इंडस्ट्री 4.0, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत विनिर्माण, गुणवत्ता प्रमाणन और अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के साथ उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी मजबूत की जाएगी।

नीति का प्रमुख लक्ष्य एमएसएमई को स्थानीय बाजार से वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ना है। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन, निर्यात ऋण एवं बीमा, माल ढुलाई, ई-कॉमर्स और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी के लिए सहायता दी जाएगी। पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

'हरियाणा निर्यात केंद्र' निर्यात दस्तावेजीकरण, लॉजिस्टिक्स, बाजार जानकारी और विदेशी खरीदारों से संपर्क के लिए एकल मंच बनेगा। वहीं 'उड़ान द्वार' के माध्यम से तकनीकी साझेदारी, संयुक्त उपक्रम और निवेशकों से संपर्क आसान होगा।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एआई आधारित बहुभाषी 'हरियाणा उद्योग साथी' भी लॉन्च किया। यह उद्यमियों को सरकारी योजनाओं, पात्रता, दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी हिंदी, अंग्रेजी, हिंग्लिश, हरियाणवी और पंजाबी में उपलब्ध कराएगा।

नीति में स्वच्छ उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा और संसाधन दक्षता को बढ़ावा देने के साथ ग्रीन इन्वेस्टमेंट फंड का प्रावधान किया गया है। महिलाओं, दिव्यांगजनों, पूर्व सैनिकों, अग्निवीरों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष पहल भी की जाएंगी।

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