आजमगढ़ , मई 30 -- उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ जिले की एक अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद नीलम सोनकर को दो पुराने चुनावी मामलों में बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है। अदालत ने दोनों मामलों में अभियोजन पक्ष की ओर से मुकदमे वापस लेने की अनुमति देते हुए नीलम सोनकर सहित सभी आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया।
दीवानी न्यायालय स्थित अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए)/सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अनुपम कुमार त्रिपाठी की अदालत ने यह फैसला सुनाया। दोनों मामले क्रमशः वर्ष 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान कथित आचार संहिता उल्लंघन से संबंधित थे।
पूर्व सांसद की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विश्व दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि पहला मुकदमा 19 अप्रैल 2009 को बरदह थाने में तथा दूसरा मुकदमा 20 मार्च 2014 को देवगांव थाने में दर्ज किया गया था। आरोप था कि नीलम सोनकर और उनके सहयोगियों ने बिना प्रशासनिक अनुमति के रोड शो और चुनावी सभाएं आयोजित कर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया था।
पुलिस जांच के बाद दोनों मामलों में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था और मुकदमे लंबे समय से विचाराधीन थे। अधिवक्ता के अनुसार बाद में राज्य सरकार ने सांसदों और विधायकों से जुड़े कुछ मामलों, जिनमें आचार संहिता उल्लंघन जैसे प्रकरण शामिल थे, को वापस लेने की अनुमति मांगी थी।
बताया गया कि इस विषय पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनवरी 2026 में संबंधित मामलों को वापस लेने की अनुमति प्रदान की। इसके बाद अभियोजन अधिकारी की ओर से नीलम सोनकर और अन्य आरोपितों के विरुद्ध दर्ज दोनों मुकदमों को वापस लेने के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया।
अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अभियोजन वापसी की अनुमति दे दी और अपने आदेश में नीलम सोनकर सहित कुल 17 आरोपितों को दोषमुक्त घोषित कर दिया।
उल्लेखनीय है कि एक मामले में लगभग 17 वर्ष तथा दूसरे में करीब 12 वर्ष तक न्यायिक प्रक्रिया चलने के बाद यह फैसला आया है।
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