बैतूल , अगस्त 09 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में करीब 130 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई टू-लेन सड़क बारिश के दौरान वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। सोनाघाटी वन विभाग बैरियर से आमला होते हुए छिंदवाड़ा सीमा तक बनी इस सड़क पर तेज बारिश के बाद कई स्थानों पर पानी जमा हो जाता है। कई जगह सड़क नहर जैसी नजर आने लगती है। सड़क किनारे और डिवाइडर के बीच पानी निकासी के लिए लगाए गए पाइप धूल, मिट्टी और गाद से चोक होने के कारण जल निकासी प्रभावित हो रही है।

लोक निर्माण विभाग द्वारा करीब आठ वर्ष पहले 2018 में बैतूल शहर से छिंदवाड़ा जिले में नागदेव मंदिर के समीप तक इस सड़क का निर्माण कराया गया था। शहर के बीच से गुजरने वाली सड़क पर डिवाइडर बनाए गए हैं। निर्माण के दौरान जल निकासी के लिए ड्रेनेज पाइप लगाए गए थे, लेकिन लंबे समय से सफाई और रखरखाव नहीं होने के कारण कई स्थानों पर पाइप बंद हो चुके हैं।

बारिश के दौरान सबसे अधिक परेशानी कोठी बाजार, आकाशवाणी रोड और हमलापुर क्षेत्र में सामने आ रही है। कोठी बाजार में कोतवाली चौराहे के समीप सड़क पर पानी जमा हो रहा है, जबकि हमलापुर में प्राथमिक स्कूल के पास भी जलभराव की स्थिति बन रही है। पानी जमा होने के कारण वाहन चालकों को गति कम करनी पड़ती है और दोपहिया वाहन चालकों के संतुलन बिगड़ने की आशंका बनी रहती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार बैतूल से आमला के बीच कई स्थानों पर सड़क निर्माण के दौरान ढाल और जल निकासी व्यवस्था में खामियां रह गईं। बारिश का पानी पर्याप्त ढाल नहीं मिलने के कारण सड़क पर ही रुक जाता है। इसके अलावा ड्रेनेज पाइपों में मिट्टी और गाद भर जाने से समस्या और गंभीर हो गई है।

बैतूल से आमला के बीच करीब 72 स्थान ऐसे बताए जा रहे हैं, जहां बारिश के दौरान पानी सड़क पर जमा हो रहा है। बोड़खी और खंडारा के पास भी सड़क पर घुटनों तक पानी जमा होने की स्थिति सामने आ रही है। इन स्थानों से गुजरने वाले वाहनों के पहियों से पानी दूसरे वाहनों और राहगीरों पर उछलने से परेशानी होती है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

शहर के व्यस्त हिस्सों से गुजरने वाली सड़क पर जलभराव के कारण यातायात भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों ने ड्रेनेज पाइपों की सफाई कराने और जहां सड़क की ढाल में तकनीकी खामी है, वहां आवश्यक सुधार कराने की मांग की है। लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री मनीष कुमार मरकाम ने कहा कि जलभराव वाले स्थानों की समस्या पर ध्यान दिया जाएगा और पानी की निकासी के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे।

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