गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही , जून 23 -- छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में 108 संजीवनी एम्बुलेंस की तत्परता से मंगलवार को एक गर्भवती महिला का रास्ते में ही सुरक्षित प्रसव कराया गया। महिला और नवजात शिशु दोनों स्वस्थ हैं तथा उन्हें आगे की चिकित्सकीय देखरेख के लिए बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम कोरजा निवासी गोमती (28), पति संदीप को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल जीपीएम में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकीय परीक्षण में प्रसव में रुकावट तथा अपेक्षित प्रगति नहीं होने की स्थिति बिगड गई। जिला अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण चिकित्सकों ने महिला को बेहतर उपचार के लिए सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया।
परिजन महिला को डायल 108 एम्बुलेंस से बिलासपुर ले जा रहे थे। इसी दौरान कोनी (बिलासपुर) के समीप पहुंचने पर प्रसव पीड़ा अचानक अत्यधिक बढ़ गई और स्थिति गंभीर हो गई। हालात को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात ईएमटी चंद्रिका प्रसाद ने तत्काल एम्बुलेंस रुकवाई और सहायक पायलट शिवशंकर पुरी तथा साथ में मौजूद मितानिन के सहयोग से एम्बुलेंस के भीतर ही प्रसव की व्यवस्था की।
टीम की तत्परता और कुशलता से गोमती ने एम्बुलेंस में ही एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। प्रसव के बाद जच्चा और नवजात को तत्काल सिम्स अस्पताल बिलासपुर पहुंचाया गया, जहां दोनों की हालत सामान्य और स्वस्थ बताई जा रही है। परिजनों ने सुरक्षित प्रसव के लिए 108 संजीवनी एम्बुलेंस के कर्मचारियों और मितानिन के प्रति आभार व्यक्त किया है।
इस घटना के बीच जिला अस्पताल गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में स्थायी एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की अनुपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार पिछले लगभग 25 दिनों से अस्पताल में स्थायी एनेस्थीसिया डॉक्टर पदस्थ नहीं हैं और वर्तमान में मनेंद्रगढ़ से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत विशेषज्ञ चिकित्सक बुलाए जा रहे हैं। इसके कारण आपातकालीन परिस्थितियों में गर्भवती महिलाओं तथा अन्य गंभीर मरीजों को बिलासपुर रेफर करना पड़ रहा है, जिससे उपचार में विलंब और जोखिम की आशंका बनी रहती है।
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