नई दिल्ली , अगस्त 5 -- उद्योग व्यापार और वित्तीय बाजार क्षेत्र के विशेषज्ञों और कारोबारियों ने मौद्रिक नीति संबंधी रिजर्व बैंक के ताजा निर्णयों को संतुलित और व्यावहारिक बताते हुए कहा है कि इससे कारोबार जगत का विश्वास बढ़ेगा और निवेश में तेजी आयेगी।
एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया ने मुंबई में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद बुधवार की गयी घोषणाओं में नीतिगत ब्याज दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने के निर्णय का स्वागत किया है। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी ) वृद्धि के अनुमान को बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत से 6.7 प्रतिशत और खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.1 प्रतिशत से 5 प्रतिशत किए जाने का भी स्वागत किया है। एसोचैम का वृद्धि का अनुमान 7 प्रतिशत है।
एसोचैम का मानना है कि यह निर्णय ब्याज दरों में स्थिरता सुनिश्चित कर कारोबारी विश्वास को और मजबूत करेगा, निवेश को प्रोत्साहित करेगा तथा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की विकास गति को बनाए रखने में सहायक होगा। एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, " रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का आरबीआई का निर्णय भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) बुनियाद पर उसके विश्वास को दर्शाता है। स्थिर नीतिगत दर से कारोबारी माहौल को मजबूती मिलेगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। साथ ही, बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप आवश्यक नीतिगत लचीलापन भी बना रहेगा।"भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन तथा इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सी. एस. शेट्टी ने कहा, " नीतिगत दर को यथावत रखते हुए विकास दर के अनुमान को बढ़ाना तथा मुद्रास्फीति के अनुमान को कम करना आरबीआई के संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। मौद्रिक नीति का मार्गदर्शन निरंतरता बनाए रखते हुए व्यापक आर्थिक स्थिरता को सुदृढ़ करता है।" उन्होंने ऋण दर निर्धारण (लोन प्राइसिंग) में अधिक पारदर्शिता लाने तथा मौद्रिक नीति के बेहतर संप्रेषण को मजबूत करने के लिए ब्याज दर ढांचे की प्रस्तावित समीक्षा एक स्वागतयोग्य कदम बताया है।
श्री शेट्टी ने कहा कि इसके अलावा, शहरी सहकारी बैंकों के लिए ऑन-टैप लाइसेंसिंग व्यवस्था को पुनः शुरू करने तथा ग्रामीण सहकारी संस्थाओं में पोर्टफोलियो एकाग्रता से जुड़े मुद्दों के समाधान जैसे प्रस्ताव सहकारी बैंकिंग प्रणाली को और सशक्त बनाएंगे। इससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा और अंतिम छोर तक ऋण की पहुंच और मजबूत होगी।
कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के सीआईओ (ऋण पत्र) दीपक अग्रवाल ने कहा कि रेपो दर स्थिर रखने का निर्णय बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप रहा। इस नीति में हल्का नरम रुख दिखाई देता है, क्योंकि इसमें मुद्रास्फीति का अनुमान घटाकर 5.0 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किया गया है। श्री अग्रवाल ने कहा, आरबीआई का यह अनुमान भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति में सुधार को दर्शाता है।"फ्रैंकलिन टेम्पलटन के सीआईओ एवं प्रबंध निदेशक ( फिक्स्ड इनकम) राहुल गोस्वामी ने कहा, ' आरबीआई ने व्यापक रूप से अपेक्षित निर्णय के अनुरूप नीतिगत दरों को यथावत रखा है, जिससे मजबूत आर्थिक वृद्धि और नियंत्रित मुद्रास्फीति के बीच संतुलन कायम रखा गया है। तटस्थ रुख बनाए रखते हुए केंद्रीय बैंक ने भविष्य के लिए आवश्यक लचीलापन बरकरार रखा है, न कि सख्ती के संकेत दिए हैं।" उनका मानना है कि आने वाले समय में ऋण प्रतिभूतियों में निवेश के प्रतिफल (यील्ड) की दिशा भविष्य की मौद्रिक नीति की अपेक्षाओं से अधिक वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और उनके मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले प्रभाव से तय होगी।
कोटक लाइफ इंश्योरेंस के सीनियर एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (इन्वेस्टमेंट) चर्चिल भट्ट ने कहा कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि वह तरलता प्रबंधन में सक्रिय रुख बनाए रखेगी और रातोंरात बाजार दरों को नीतिगत दरों के दायरे के अनुरूप रखने का प्रयास करेगी। बाजार के दृष्टिकोण से 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल दर सीमित दायरे में रहने की संभावना है।
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