चेन्नई , सितंबर 25 -- मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की है कि यदि 'हाउस वाइफ' (गृहिणी) हो सकती हैं, तो 'हाउस हसबैंड' (घर संभालने वाले पति) भी हो सकते हैं और यह अवधारणा भी आम बात हो सकती है।

न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन और एमडी सुमति की खंडपीठ ने तिरुवन्नामलाई के एक चिकित्सक दंपती को आपसी सहमति से तलाक देते हुए कहा कि अगर पति घर की जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार हों तो यह स्थिति (अविवाहित महिलाओं की बढ़ती संख्या) बदल सकती है। अगर 'हाउस वाइफ' हो सकती हैं, तो 'हाउस हसबैंड' भी हो सकते हैं और यह एक नयी अवधारणा हो सकती है-एक ऐसी अवधारणा, जिसके बारे में पहले कभी नहीं सुना गया, हालांकि कई पति खाना पकाने सहित घर के विभिन्न कामों में अपनी पत्नियों की मदद करते हैं।

पीठ ने चिकित्सक दंपती की शादी को आपसी सहमति से खत्म करते हुए कहा कि पुरुषों का होममेकर की भूमिका निभाना एक नया नियम बन सकता है और शादी एवं परिवार की संस्था को बचाने में मदद कर सकता है।पीठ ने इस पृष्ठभूमि में 'हाउसवाइफ' (काम न करने वाली विवाहित महिलाएं) की तर्ज पर 'हाउस हसबैंड' की अवधारणा का सुझाव दिया, जो एक नयी सामान्य बात बन सकती है।

न्यायालय ने कहा कि 'होममेकर' (घर संभालने वाला) शब्द लैंगिक रूप से तटस्थ है और घर संभालने का आर्थिक मूल्य भी होता है।

न्यायालय ने उन अविवाहित महिलाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की, जिनका मानना है कि शादी नौकरी पाने में बाधा है और वे इससे बच रही हैं।

पीठ ने कहा, "इस मामले में पति तब तक एक खास व्यवस्था से खुश था जब तक कि वह पूरी तरह से और अपनी संतुष्टि के अनुसार योग्य नहीं बन गया। एक सफल पेशेवर बनने के बाद पुरुष अहंकार पूरी तरह से हावी हो गया। जो व्यवस्था एक दशक तक और कोविड के दौरान काम कर रही थी, वह अब व्यावहारिक नहीं रही। हमने दोनों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए बुलाया। यह स्पष्ट था कि रिश्ता पूरी तरह से टूट चुका था और उसे सुधारा नहीं जा सकता था।"न्यायालय ने कहा कि 'भारतीय संस्कृति' में परिवार एक बुनियादी इकाई है और घर चलाने व कमाने की जिम्मेदारियों को समान सम्मान मिलना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि 'होममेकर' (घर संभालने वाला) शब्द लैंगिक रूप से तटस्थ है और घर संभालने का आर्थिक मूल्य भी होता है। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए डॉ. वेंकटेशन के 2.5 करोड़ रुपये देने पर सहमत होने और डॉ. आरती के इसे स्वीकार करने के बाद अदालत ने आपसी सहमति से शादी खत्म कर दी।

अदालत ने डॉ. वेंकटेशन को आदेश की कॉपी मिलने के तीन महीने के भीतर डॉ. आरती के बैंक खाते में 1.5 करोड़ रुपये और एक साल के भीतर अपने दो नाबालिग बच्चों के नाम पर 50-50 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी कहा कि तलाक का आदेश तभी लागू होगा जब ये वित्तीय दायित्व पूरे कर लिए जायेंगे।

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