हैदराबाद , जून 07 -- भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने बेंगलुरु में 'द हिंदू कॉन्क्लेव' के दौरान दिये गये बयानों को लेकर तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी पर तीखा हमला बोला।

श्री रामाराव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने पूरे देश के सामने अपनी 'तानाशाही और फासीवादी मानसिकता' उजागर कर दी है।

श्री रेवंत रेड्डी के 'हाइड्रा' की कार्यप्रणाली की तुलना एडॉल्फ हिटलर के कदमों से किये जाने का जिक्र करते हुए श्री रामाराव ने एक बयान जारी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का यह बयान कांग्रेस सरकार के 'विध्वंस-आधारित शासन मॉडल' के वैचारिक आधार को दर्शाता है।

श्री रामाराव ने कहा, "हिटलर साफ तौर पर श्री रेवंत रेड्डी के प्रेरणास्रोत हैं। हाइड्रा शासन की उस शैली को दर्शाता है, जो ताकत के इस्तेमाल, डराने-धमकाने और तोड़फोड़ को बढ़ावा देती है।" उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना की जनता पहले ही ऐसी 'तानाशाही प्रवृत्तियों' को देख चुकी है।

बीआरएस नेता ने आगे आरोप लगाया कि 'हाइड्रा' आम नागरिकों के घरों और उनकी आजीविका को निशाना बनाकर 'हत्यारी एजेंसी' की तरह काम कर रही है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर सुशासन और जन कल्याण के बजाय जबरन वसूली तथा डराने-धमकाने की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

श्री रामाराव ने दावा किया कि पिछली बीआरएस सरकार ने पूरी तरह से लोकतांत्रिक और संवैधानिक सिद्धांतों पर काम किया था।उन्होंने कहा, "हमारे आदर्श डॉ बीआर अंबेडकर, महात्मा गांधी और प्रोफेसर जयशंकर हैं- हिटलर नहीं।" उन्होंने कहा कि बीआरएस सरकार ने हमेशा संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुसार ही राज्य का संचालन किया था।

कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए श्री रामाराव ने पूछा कि क्या पार्टी सार्वजनिक रूप से हिटलर को अपनी प्रेरणा बताने वाले मुख्यमंत्री का समर्थन करती है? उन्होंने कहा, "तेलंगाना की जनता इस पर जवाब चाहती है।"तानाशाही शासन को सामान्य बनाने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी देते हुए श्री रामाराव ने कहा कि तेलंगाना के लोग 'तानाशाही और तोड़फोड़ की राजनीति' को पूरी तरह से खारिज कर देंगे।

उन्होंने दोहराया कि बीआरएस लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक शासन और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

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