लखनऊ , मार्च 18 -- ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता को सुदृढ़ करने की दिशा में उत्तर प्रदेश ने एक और अहम कदम बढ़ाया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गये हैं। इस अवसर पर योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल वर्चुअल माध्यम से मौजूद रहे।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'हर घर नल से जल' के लक्ष्य को जमीन पर उतारने की दिशा में यह समझौता मील का पत्थर साबित होगा। इससे पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन में गति, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित होगी, जिसका सीधा लाभ ग्रामीण परिवारों को मिलेगा।

उन्होंने केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय को इस पहल की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए नरेंद्र मोदी का आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतिम व्यक्ति तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का संकल्प अब तेजी से साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पेयजल व्यवस्था में आए व्यापक बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले जहां सीमित गांवों तक ही पाइप पेयजल की सुविधा थी। वहीं अब हजारों गांवों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित हो रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों पर नियंत्रण में स्वच्छ जल और बेहतर स्वच्छता की अहम भूमिका रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का फोकस केवल कनेक्शन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि योजनाओं के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में बड़ी संख्या में गांवों में जलापूर्ति के साथ अनुरक्षण व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अब योजना को उन सभी गांवों तक विस्तारित किया गया है, जहां अभी तक पाइप पेयजल की सुविधा नहीं पहुंची थी। बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्रों में, जहां कभी पानी की गंभीर किल्लत थी, वहां अब घर-घर नल से जल पहुंच रहा है।

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