भोपाल , अक्टूबर 18 -- मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नृत्य, गायन और वादन पर केंद्रित गतिविधि 'संभावना' के तहत 17 और 18 अक्टूबर को गरबा एवं डांडिया रास का आयोजन किया गया। दोपहर तीन बजे से आयोजित कार्यक्रम में संग्रहालय घूमने आए पर्यटकों और दर्शकों ने भी सहभागिता की।

कार्यक्रम में गुजरात की मीनल उदय सेवक एवं साथियों ने गरबा और रास गायिकी प्रस्तुत की। 18 अक्टूबर को इंदौर के अमित सिंह धुर्वे एवं साथियों ने भक्ति गीतों और भजनों की प्रस्तुति दी। श्योपुर के जितेंद्र शर्मा एवं साथियों ने सहरिया जनजातीय लहंगी नृत्य तथा खरगोन की प्रीति कनाड़े एवं साथियों ने गणगौर नृत्य प्रस्तुत किया।

गणगौर निमाड़ के जनजीवन से जुड़ा पारंपरिक गीति काव्य है। चैत्र मास में मनाए जाने वाले इस उत्सव के दौरान गीत-संगीत और नृत्य की विशेष परंपरा है। इसमें महिलाएं और पुरुष रनुबाई तथा धणियर सूर्यदेव के प्रतीकात्मक रथ सिर पर रखकर नृत्य करते हैं। ढोल और थाली इसके प्रमुख वाद्य हैं। गणगौर निमाड़ के अलावा राजस्थान, गुजरात और मालवा में भी लोकप्रिय है।

सहरिया जनजाति का लहंगी नृत्य समूह में किया जाता है। रक्षाबंधन के दूसरे दिन मनाए जाने वाले भुजरिया पर्व के जुलूस में पुरुष ढोलक की थाप पर हाथों में डंडे लेकर गोल घेरे में लयबद्ध नृत्य करते हैं। युवा सहरिया इस नृत्य को रक्षाबंधन के अलावा तेजाजी पूजा मेले और एकादशी जैसे अवसरों पर भी प्रस्तुत करते हैं।

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