चंडीगढ़ , अक्टूबर 23 -- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को रद्द करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चुनाव आयोग केनाम पर मतदाता सूचियों में हेरफेर कर रही है।
उन्होंने प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पंजाब विधानसभा ने एसआईआर के खिलाफ प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया। विधानसभा में नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मान ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने पक्ष में वोट जुड़वा रही है और विपक्ष के मतदाताओं के नाम कटवा रही है। उन्होंने बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों में भी कथित 'वोट चोरी' का आरोप लगाया।
श्री मान ने कहा कि पहले जनता अपने मत से सरकार चुनती थी, लेकिन अब ऐसी स्थिति बन रही है कि सरकार तय करनेलगी है कि कौन मतदान कर सकेगा। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक को बिना किसी भय या मनमाने प्रतिबंध के मतदान का अधिकार मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिकको समानता, गरिमा और राजनीतिक भागीदारी का अधिकार देता है। उन्होंने मतदाता सूची से कुछ वर्गों के लोगों के नामकाटे जाने को लेकर चिंता जताई और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
श्री मान ने सवाल उठाया कि विधानसभा क्षेत्र में आपत्तियां विरोध-प्रदर्शन शुरू होने के बाद ही क्यों उठाई गईं। उन्होंने चुनाव आयोग की बैठकों की कार्यवाही का औपचारिक रिकॉर्ड रखने के फैसले और आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों का भी उल्लेख करते हुए आयोग के कामकाज की सार्वजनिक जांच की जरूरत बताई।उन्होंने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो जैसी केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज को लेकर भी निशाना साधा।
श्री मान ने कहा कि संवैधानिक और जांच संस्थाओं को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए। उनके मुताबिक, चुनाव जीतना संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का अधिकार नहीं देता।मुख्यमंत्री ने अपनी प्रस्तावित विदेश यात्रा के दौरान पंजाब में निवेश आकर्षित करने के प्रयासों में आई कथित बाधाओं का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य की औद्योगिक क्षमता, कुशल श्रमशक्ति और उद्यमशीलता को अंतरराष्ट्रीय कारोबारी समुदाय के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इस मामले में हुई कार्रवाई और सीमा शुल्क विभाग की भूमिका पर पारदर्शिता तथा जवाबदेही की जरूरत जताई।
श्री मान ने प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौतों की पारदर्शी समीक्षा होनी चाहिए और संसद, राज्य सरकारों तथा किसान संगठनों को उनके प्रभावों पर विचार करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसान अपने हितों और आजीविका से समझौता करने वाले किसी भी प्रावधान को स्वीकार नहीं करेंगे।
मुख्यमंत्री ने लोगों से संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक की आवाज का सम्मान होना चाहिए और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर निष्पक्ष चुनाव तथा संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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