पटना , सितंबर 02 -- बिहार के नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने बुधवार को कहा कि बिहार के हर शहर की भौगोलिक, ऐतिहासिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए 'वन साइज फिट्स ऑल' की जगह सभी शहरों के लिए स्थानीय जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान तैयार किया जायेगा। मंत्री श्री मिश्रा ने आज यहाँ आयोजित दो दिवसीय 'बिहार के शहरों का सतत विकास, नियोजन की प्रक्रिया और चुनौतियों को समझने पर जोर' कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि शहर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के ग्रोथ सेंटर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि बिहार के शहर संतुलित, समावेशी, टिकाऊ और बेहतर 'ईज ऑफ लिविंग' के हिसाब से बनें।

श्री मिश्रा ने अधिकारियों और शहरी स्थानीय निकायों को निर्देश दिये कि कार्यशाला को केवल एक शैक्षणिक अभ्यास के रूप में न लें। अलग-अलग शहरों के अनुभवों से सीखते हुए अपने-अपने शहरों के लिए व्यावहारिक और प्रभावी योजनाएं तैयार कर उन्हें धरातल पर उतारना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को विकसित और समृद्ध बिहार देने के लिए आज की शहरी प्लानिंग दूरदर्शी होनी चाहिए।

मंत्री ने कहा कि शहरों के विकास की रणनीति तैयार करते समय स्थानीय परिस्थितियों को केंद्र में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी एक शहर में सफल मॉडल को उसी रूप में दूसरे शहर में लागू करने के बदले वहां की भौगोलिक संरचना, जनसंख्या, आर्थिक गतिविधियों, ऐतिहासिक विरासत और उपलब्ध संसाधनों का अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने दिल्ली के मास्टर प्लान और देश के अन्य सफल शहरी विकास मॉडलों से सीख लेने की जरूरत बताई।

श्री मिश्रा ने युवा अधिकारियों और योजनाकारों से अपनी पूरी क्षमता और प्रतिबद्धता के साथ बिहार के शहरीकरण को नई दिशा देने का आह्वान किया।

नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने कहा कि बिहार में शहरी विकास को नियोजित और टिकाऊ बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों तथा जीआईएस आधारित प्लानिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को साक्ष्य आधारित योजना तैयार करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

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