श्रीनगर , अक्टूबर 24 -- कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) ने शनिवार को केंद्र सरकार को लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांगों पर और देरी नहीं करने की चेतावनी देते हुए कहा कि लोग अनिश्चितकाल तक चुप नहीं रहेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय और लद्दाख के नेताओं के बीच बातचीत में गतिरोध के बीच कारगिल में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केडीए के नेताओं ने गृह मंत्रालय की ओर से प्रस्तावित प्रशासनिक ढांचे को खारिज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रस्ताव पिछली बैठकों की प्रतिबद्धताओं पर खरा नहीं उतरता और लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल है।
केडीए और लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) पिछले कई वर्षों से लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं और इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं।
केडीए के सह-अध्यक्ष सज्जाद कारगिली ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार नहीं की गयी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासन के हितों को प्राथमिकता दी गयी है। उन्होंने कहा कि केडीए और लेह एपेक्स बॉडी ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और केंद्र के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज करा दी हैं।
श्री कारगिली ने लद्दाख प्रशासन पर लगातार आदेश और अधिसूचनाएं जारी करके लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गठबंधन संवैधानिक सुरक्षा उपायों और लोगों के अधिकारों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगा।
उन्होंने कहा, "हम केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन की उस तानाशाहीपूर्ण कार्यशैली की निंदा करते हैं, जिसके तहत हम पर लगातार एक के बाद एक आदेश थोपे जा रहे हैं। यह लद्दाख के लोगों के अधिकारों पर हमला है।"देश के अन्य हिस्सों में चुनावी अनियमितताओं के आरोपों का उल्लेख करते हुए श्री कारगिली ने कहा कि लद्दाख के साथ एक "प्रयोगशाला" जैसा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर किया गया है।
उन्होंने कहा, "लद्दाख को एक प्रयोगशाला बना दिया गया है। यहां लोगों का प्रतिनिधित्व ही छीन लिया गया है।" उन्होंने कहा कि जहां देश के अन्य हिस्सों में "वोटों की चोरी" के आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं उनके अनुसार लद्दाख में लोगों के प्रतिनिधित्व का नुकसान हुआ है।
केडीए के सह-अध्यक्ष और कारगिली के सहयोगी असगर अली करबलई ने कहा कि लद्दाख में छाई चुप्पी को डर या समर्पण नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह 'तूफान आने से पहले की शांति' है।
श्री करबलई ने कहा, "प्रशासन को मौजूदा चुप्पी को डर, अधीनता या समर्पण नहीं समझना चाहिए।" उन्होंने बताया कि केडीए और लेह एपेक्स बॉडी पिछले छह वर्षों से गृह मंत्रालय के साथ अपने चार सूत्री एजेंडे पर बातचीत कर रहे हैं। राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा उपाय उनकी दो प्रमुख मांगें हैं।
श्री करबलई ने कहा कि 22 मई को हुई बैठक के कार्यवृत्त में लद्दाख के लिए विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियों से युक्त विशेष प्रशासनिक व्यवस्था तथा संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर सहमति दर्ज की गई थी। इस कार्यवृत्त पर सात जुलाई को हस्ताक्षर किए गए थे।
श्री करबलई ने आरोप लगाया कि 15 अक्टूबर की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की ओर से पेश किया गया प्रस्ताव पहले की सहमतियों के विपरीत था। उन्होंने कहा कि इसमें ऐसी व्यवस्था का प्रस्ताव दिया गया, जिसमें न तो वास्तविक अधिकार थे और न ही संवैधानिक गारंटी।
उन्होंने कहा, "जिन अधिकारों को देने पर लिखित सहमति बनी थी और जिनके लिए बैठक का कार्यवृत्त हस्ताक्षरित किया गया था, अब वे अधिकार हमें देने से इनकार किया जा रहा है।"उन्होंने कहा कि प्रस्तावित परिषद के पास पर्याप्त वित्तीय अधिकार, जमीन से जुड़े मामलों पर अधिकार और स्वतंत्र कार्यकारी शक्तियां नहीं हैं। उन्होंने बताया कि कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) और लेह एपेक्स बॉडी ने संवैधानिक तथा कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद प्रस्ताव पर विस्तृत जवाब सौंपा है।
श्री करबलई ने चेतावनी दी कि यदि सरकार प्रक्रिया में देरी जारी रखती है, तो गठबंधन अपना आंदोलन तेज करेगा। उन्होंने कहा, "अगर कल हमें अपनी मांगों और मुद्दों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा, आंदोलन करना पड़ा, विरोध प्रदर्शन करने पड़े, बंद बुलाना पड़ा, हड़ताल करनी पड़ी या जेलें भरनी पड़ीं, तो हम ऐसा करेंगे।"लद्दाख के सांसद हाजी मोहम्मद हनीफा जान ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था से उन उम्मीदों को झटका लगा है, जो पिछली चर्चाओं के दौरान पैदा हुई थीं। उन चर्चाओं में दोनों पक्ष व्यवस्था के व्यापक स्वरूप पर सहमति पर पहुंचे थे।
उन्होंने केंद्र सरकार से स्थगित बैठक जल्द से जल्द बुलाने और हस्ताक्षरित कार्यवृत्त में दर्ज प्रतिबद्धताओं के अनुरूप मसौदा पेश करने का आग्रह किया। श्री जान ने कहा कि लद्दाख के लोग अपनी नीतियां खुद तय करना चाहते हैं और क्षेत्र के विकास की दिशा निर्धारित करना चाहते हैं। उन्होंने साथ ही जोर दिया कि गठबंधन चाहता है कि लद्दाख में शांति बनी रहे।
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