नागपुर , जुलाई 08 -- महाराष्ट्र में नागपुर साइबर प्रकोष्ठ ने 'मस्त मनी ऐप' से जुड़े 200 करोड़ रुपये के ऑनलाइन धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है।

साइबर प्रकोष्ठ के अधिकारियों के मुताबिक 'मस्त मनी ऐप' (जिसे 'सॉफ्ट मनी ऐप' भी कहा जाता है) के ज़रिए देश भर में लगभग पांच लाख लोगों के साथ धोखाधड़ी की गयी है और इसमें लगभग 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का शक है।

उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि आरोपी उपभोक्ताओं को जल्दी पैसे कमाने, तुरंत लोन और आकर्षक रिटर्न का लालच देते थे। पीड़ितों को फायदे का भरोसा दिलाकर पैसे जमा करने के लिए कहा जाता था, लेकिन कई लोगों का कहना है कि उन्हें न तो वादे के मुताबिक सेवा मिली और न ही उनके पैसे वापस मिले। साइबर सेल ने भोपाल के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ़्तार किया है, जिस पर इस रैकेट का मुख्य सदस्य होने का शक है।आरोपी ने ही यह मोबाइल ऐप बनाया था और इसका इस्तेमाल 15,000 रुपये तक के तुरंत लोन का ऑफ़र देकर उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए किया था।

जांच कर्ताओं के मुताबिक, एक बार इंस्टॉल होने के बाद यह ऐप उपभोक्ताओं के मोबाइल फ़ोन से कई तरह की अनुमति (परमिशन) ले लेता था, जिससे धोखाधड़ी करने वालों को निजी जानकारी, संपर्क सूची, फ़ोटो और दूसरी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच मिल जाती थी। पुलिस ने बताया कि आरोपी इकट्ठा किए गए डेटा का इस्तेमाल पीड़ितों को ब्लैकमेल करने और उनसे पैसे ऐंठने के लिए करते थे। वादा किये गये ऋण को देने के बजाय यह गिरोह उपभोक्ताओं से 25,000 रुपये से 50,000 रुपये तक की मांग करता था। जो लोग पैसे देने से मना करते थे, उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर उनकी निजी जानकारी और फ़ोटो लीक करने की धमकी दी जाती थी। नागपुर के दो लोगों ने इसी तरह की परेशानी की शिकायत साइबर प्रकोष्ठ से की, जिसके बाद जांच शुरू की गई।

अधिकारियों ने बताया कि यह धोखाधड़ी का काम पिछले आठ महीनों से चल रहा था और वर्चुअल नेटवर्क के ज़रिए अपनी गतिविधियों को छिपाते हुए पूरे भारत में लोगों को निशाना बनाया जा रहा था। शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए, नागपुर पुलिस की टीम ने इस गिरोह का पता भोपाल में लगाया और सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ़्तार किया। बाद में उसे विस्तृत पूछताछ के लिए नागपुर लाया गया।

साइबर प्रकोष्ठ ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे ऑनलाइन ऋण और निवेश ऐप का इस्तेमाल करते समय सावधान रहें, निजी जानकारी साझ करने या भुगतान करने से पहले ऐसे प्लेटफ़ॉर्म की असलियत की जांच करें, और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत साइबर अपराध विभाग के अधिकारियों को रिपोर्ट करें। मामले की आगे की जांच चल रही है।

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