पटना , जुलाई 10 -- िहार सरकार के वित्त विभाग ने बच्चों पर सार्वजनिक निवेश को अधिक सुदृढ़ और सटीक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में 'बिहार बाल कल्याण बजट 2026-27' की संरचना, वर्गीकरण, आवंटन और व्यय प्रणाली को और बेहतर करने के लिए यूनिसेफ और चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (सीएनएलयू), पटना के बाल अधिकार केंद्र के सहयोग से एक दिवसीय तकनीकी परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बाल केंद्रित सार्वजनिक वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

इस दौरान मुख्य तकनीकी सत्र एवं विभागीय चर्चा का में वित्त विभाग की सचिव (व्यय) श्रीमती रचना पाटिल ने कहा कि बिहार वर्ष 2013-14 से ही बाल बजटिंग को संस्थागत रूप देने वाले देश के अग्रणी राज्यों में रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 13 वर्षों में राज्य की बजटीय प्राथमिकताओं में बच्चों के कल्याण को ऐतिहासिक स्थान मिला है। कुल राज्य बजट में बाल-केंद्रित व्यय की हिस्सेदारी में लगभग 11 प्रतिशत पॉइंट्स की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रति बच्चा लोक व्यय वर्ष 2013-14 के तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 में सात गुना से भी अधिक बढ़ गया है।

श्रीमती रचना पाटिल ने बताया कि 'बाल कल्याण बजट 2026-27' के तहत शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, जिसकी कुल बाल बजट में हिस्सेदारी 81.56 प्रतिशत है। इसमें पिछले वर्ष (2025-26) की तुलना में 13.9 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है। उन्होंने कहा कि बाल बजटिंग की तीनों प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण जैसे विभागों को मिलकर काम करना है।

यूनिसेफ बिहार की फील्ड कार्यालय प्रमुख डॉ. मोनिका ओ. नील्सन ने कहा कि राज्य की कुल आबादी में लगभग आधी हिस्सेदारी (48 प्रतिशत यानी लगभग 4.98 करोड़) बच्चों की है। ऐसे में बिहार का सतत विकास पूरी तरह बच्चों पर किए जाने वाले प्रभावी निवेश पर निर्भर करता है।

कार्यशाला में राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, वित्त विशेषज्ञ, नीति निर्माता और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विकास सहयोगियों ने भाग लिया।

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