लखनऊ , जनवरी 14 -- 'जीवन के अंतिम चरण की देखभाल' को लेकर संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है। जिसको प्रदेश भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों से साझा करने के लिए 16 जनवरी को जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन व ऑफलाइन) में होगी।
एसजीपीजीआईएमएस के अनुसार, आईसीयू में भर्ती कुछ मरीज असाध्य बीमारियों से ग्रसित होते हैं। ऐसे मामलों में चिकित्सकों के सामने यह प्रश्न होता है कि क्या जीवन रक्षक उपचार जारी रखना मरीज के कष्ट को बढ़ा रहा है या केवल सांत्वना आधारित देखभाल पर विचार किया जाना चाहिए। इसी के साथ यह मुद्दा भी महत्वपूर्ण है कि क्या कानूनी रूप से जीवन रक्षक उपचार को रोकने या बंद करने की अनुमति है।
संस्थान के अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि 2011 में उच्चतम न्यायालय ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु को वैध ठहराने के लिए दिशा-निर्देश जारी किया था। इसके बाद 2018 में गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया लेकिन उस समय जीवन रक्षक उपचार बंद करने के लिए न्यायिक स्वीकृति की प्रक्रिया जटिल होने के कारण यह व्यावहारिक रूप से कठिन थी।
अधिकारियों के अनुसार, जनवरी 2023 में शीर्ष अदालत ने अग्रिम चिकित्सा निर्देश (एडवांस मेडिकल डायरेक्टिव) और जीवन रक्षक उपचार रोकने/बंद करने को कानूनी मान्यता देते हुए प्रक्रिया को सरल किया है। इसके बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने तकनीकी संसाधन समूह गठित कर दिशा-निर्देशों का मसौदा तैयार किया जिसे 2024 के मध्य में वेबसाइट पर जनता की राय के लिए प्रकाशित किया गया।
नई प्रक्रिया के तहत प्राथमिक स्तर पर डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड उपचार की निरर्थकता प्रमाणित करेगा, फिर परिवार की सहमति ली जाएगी। इसके बाद द्वितीयक मेडिकल बोर्ड, जिसमें सीएमओ कार्यालय से नामित सदस्य शामिल होगा, अंतिम पुष्टि करेगा। आवश्यक दस्तावेजीकरण और न्यायिक मजिस्ट्रेट को सूचना भेजने के बाद जीवन रक्षक उपचार बंद किया जा सकेगा।
एसजीपीजीआईएमएस ने बताया कि संस्थान ने 'जीवन के अंतिम चरण की देखभाल' के कार्यान्वयन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है जिसे उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अमित घोष के समक्ष प्रस्तुत किया गया। उनके निर्देश पर 16 जनवरी को यह कार्यशाला आयोजित की जा रही है जिसमें प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के वरिष्ठ सदस्य भाग लेंगे।
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