नयी दिल्ली , फरवरी 20 -- राजधानी में चल रहे भारत एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन- 2026 में कृषि पर एक परिचर्चा सत्र में शुक्रवार को जलवायु परिवर्तन के दौर में 'समावेशी एवं मजबूत कृषि खाद्य प्रणाली'के लिए डेटा, डिजिटल अवसंरचना और देशों के बीच सहयोग की जरूरत पर विशेष बल दिया गया।
इस सत्र में वक्ताओं ने इस बात पर चर्चा की कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) किस प्रकार खाद्य उत्पादन, वितरण और पहुंच के बीच मौजूद वैश्विक अंतर जैसी जटिल चुनौतियों का समाधान कर सकती है। सत्र में डेटा, डिजिटल अवसंरचना और देशों के बीच सहयोग की भूमिका पर विशेष बल दिया गया, ताकि जलवायु-सहिष्णु कृषि को प्रोत्साहित, आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत और किसानों को उभरते डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में पूर्ण रूप से एकीकृत किया जा सके।
विशेषज्ञों ने कहा कि वास्तविक जरूरत केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक कुशल और समन्वित खाद्य तंत्र का विकसित करने में है, जो समय पर जरूरत के हिसाब से काम कर सके, अपव्यय कम करने वाला हो और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाएं। इसके लिए इंटरऑपरेबल ,डेटा संचालन व्यवस्था, पारदर्शी एआई प्रणालियों और नवाचारों को बड़े पैमाने पर लागू करने की स्पष्ट वृहद योजना की आवश्यक होगी। इस काम में उद्योग, सरकारों और बहुपक्षीय संस्थानों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण बताया गया।
चर्चा में भारत में नीदरलैंड के राजदूत हैरी वेरवेइजने कहा कि एआई-सक्षम कृषि उत्पादकता बढ़ाने, वैश्विक खाद्य उत्पादन की स्थिरता मजबूत , प्रकृति संरक्षण को प्रोत्साहित करने और समावेशी तरीके से जलवायु सहनशीलता बढ़ाने के स्पष्ट अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रगति से "राष्ट्रों की स्वायत्तता और स्थिरता" बढती है।
संयुक्त खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के प्रमुख सूचना अधिकारी एवं निदेशक देजान जाकोवलजेविक ने चेतावनी दी कि अब डिजिटल प्रौद्योगिकी से वंचित होने का अर्थ आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार में बदलता जा रहा है। उन्होंने एआई के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में "समान अवसर" सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
नीति आयोग की फ्रंटियर हब की विशिष्ट फेलो देवजनी घोष कहा कि विश्व पर्याप्त खाद्य उत्पादन करता है, फिर भी पहुंच और लॉजिस्टिक्स में अंतर के कारण भूख और अपव्यय की समस्या बनी हुई है। उन्होंने जटिल चुनौतियों के समाधान हेतु समर्पित उत्कृष्टता केंद्रों और नवाचार हब स्थापित करने की वकालत की।
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