भुवनेश्वर , जुलाई 09 -- ओडिशा सरकार ने राज्य के समुद्री मत्स्य क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से 'गहरे समुद्र मत्स्य पालन मिशन' की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से राज्य का लक्ष्य पूर्वी भारत का प्रमुख समुद्री मत्स्य केंद्र बनना तथा गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की क्षमता, उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देना है।

मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने गुरुवार को 'ओडिशा गहरे समुद्र मत्स्य पालन मिशन' दस्तावेज का अनावरण किया। इस दस्तावेज में राज्य की ब्लू इकोनॉमी (नीली अर्थव्यवस्था) के दीर्घकालिक रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। साथ ही ओडिशा को पूर्वी भारत का प्रमुख समुद्री मत्स्य एवं समुद्री अर्थव्यवस्था केंद्र बनाने की योजना की घोषणा की गई है।

उच्च समुद्री क्षेत्रों में मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन के लिए प्राधिकरण पत्र (एलओए) जारी करने संबंधी राष्ट्रीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि यह पहल राज्य की ब्लू इकोनॉमी को सशक्त बनाएगी और राज्य की 575 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा की अपार संभावनाओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करेगी। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने किया।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने यहां मत्स्य पालन के सतत दोहन के लिए अधिकार पत्र जारी करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की तथा 'ओडिशा गहरे समुद्र में मत्स्य पालन मिशन दस्तावेज़' जारी किया। इस दस्तावेज में राज्य की 'समुद्री अर्थव्यवस्था' के लिए लंबे समय का रोडमैप बताया गया है और ओडिशा को पूर्वी भारत का प्रमुख समुद्री केंद्र बनाने की योजना की घोषणा की गई है। पहले चरण में ओडिशा के आठ मछुआरों को अधिकार पत्र प्रदान किये गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान के तहत पारादीप, धामरा, गोपालपुर, चांदीपुर और अस्तरंगा में आधुनिक मछली लैंडिंग केंद्र, थोक मछली बाजार और एक्वा पार्क स्थापित करने की परिकल्पना की गई है। पूरे मत्स्य पालन पारिस्थितिकी तंत्र का प्रबंधन 'रियल क्राफ्ट पोर्टल' के माध्यम से किया जाएगा, जो पारदर्शिता और कुशल शासन सुनिश्चित करने वाला एक ऑनलाइन मंच है।

ओडिशा की समृद्ध समुद्री विरासत पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में समुद्री व्यापार की सदियों पुरानी परंपरा है। यह नई पहल इस विरासत को पुनर्जीवित करेगी। यह ओडिशा को पूर्वी भारत के अग्रणी समुद्री केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य पालन क्षेत्र के पूर्ण डिजिटलीकरण के साथ-साथ मत्स्य सहकारी समितियों और मछली उत्पादक किसान संगठनों (एफएफपीओ) को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री माझी ने कहा कि राज्य में आधुनिक मत्स्य अवसंरचना, मूल्य संवर्धन, वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन तथा बेहतर बाजार संपर्क (मार्केट लिंकज) में निवेश से मछली उत्पादन में वृद्धि होगी और मछुआरों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि एलओए कार्यक्रम का राष्ट्रीय शुभारंभ ओडिशा में होना राज्य के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि समुद्र केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि राज्य के लगभग छह लाख समुद्री मछुआरों की आजीविका और पहचान का आधार है।

मुख्यमंत्री ने देश में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के एक नए युग की शुरुआत करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए 'एलओए जारी करने के साथ अगला चरण शुरू हो गया है।

ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कम्भमपाटी ने कहा कि भारत की विशाल तटरेखा और विशेष आर्थिक क्षेत्र लगभग पांच करोड़ मछुआरों को आजीविका प्रदान करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एलओए कार्यक्रम से मछुआरा परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में काफी सुधार होगा।

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