जम्मू , फरवरी 11 -- जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को कहा कि 'कृषि प्रथम' की नीति न केवल विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करेगी, बल्कि आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर की नींव भी रखेगी। उन्होंने कृषि को एक ऐसी 'बीमा पॉलिसी' बताया जिसे कोई भी विकासशील समाज अनदेखा नहीं कर सकता।

उपराज्यपाल शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, जम्मू द्वारा आयोजित तीन दिवसीय 'कृषि शिखर सम्मेलन और किसान मेले' के उद्घाटन के अवसर पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने एआई आधारित उन्नत कृषि के महत्व पर जोर देते हुए वैज्ञानिकों और अधिकारियों को कहा कि वे छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऐसी सस्ती तकनीक विकसित करें, जो मौसम, मिट्टी और फसल डेटा के आधार पर उत्पादन का सटीक अनुमान लगा सके।

उपराज्यपाल ने सिंचाई में पानी की खपत को 50-60 प्रतिशत तक कम करने के लिए 'डिजिटल फार्म ट्विन्स' बनाने हेतु आईओटी सेंसर और सैटेलाइट इमेजरी के उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हमें ऐसे एआई टूल्स की जरूरत है जो पैदावार को 15-30 प्रतिशत तक बढ़ा सकें और लागत को आधा कर सकें। तकनीक और कृषि का विकास साथ-साथ चलना चाहिए।"श्री सिन्हा ने जानकारी दी कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एनडीडीबी के माध्यम से प्रतिदिन दो लाख लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फसल अवशेषों को पशु आहार में बदलने और जैविक उर्वरकों को बढ़ावा देने के लिए 'सर्कुलर फार्मिंग मॉडल' विकसित करें। साथ ही, बिचौलियों को खत्म करने के लिए किसान उत्पादक संगठनों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ने पर जोर दिया।

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