मुंबई , अक्टूबर 05 -- शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने सोमवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार सरकारी रोस्टर में आठ घंटे की ड्यूटी दिखाकर कांस्टेबलों से 12 से 14 घंटे काम कराकर पुलिस बल का व्यवस्थित शोषण कर रही है।

श्री राउत ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर एक पाेस्ट में राज्य नेतृत्व पर कड़ा प्रहार करते हुए मानवाधिकार संकट का मुद्दा उठाया और कहा कि आधिकारिक स्टेशन लॉग में भले ही आठ घंटे की निर्धारित पाली दर्ज हो, लेकिन पुलिसकर्मियों को अनौपचारिक और मौखिक आदेशों के जरिये लगातार अतिरिक्त समय तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।

वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपे गये आधिकारिक ड्यूटी रोस्टर में आठ-आठ घंटे की तीन पालियों की सुचारू तस्वीर पेश की जाती है, जिसे श्री राउत ने जमीनी हकीकत छिपाने वाली महज कागजी कार्रवाई करार दिया।

.लगातार सुरक्षा तैनाती, वीआईपी व्यवस्था, राजनीतिक रैलियों और बढ़ते शहरी अपराध के कारण पुलिसकर्मी साप्ताहिक छुट्टियों से वंचित हैं, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर घातक असर पड़ रहा है। श्री राउत ने अपनी बात के पक्ष में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के कार्यकाल के दौरान चार मई 2022 को जारी ऐतिहासिक शासन निर्णय (जीआर) की आधिकारिक प्रति साझा की, जिसके तहत बृहन्मुंबई पुलिस कर्मियों के लिए 'आठ घंटे की ड्यूटी और 16 घंटे का विश्राम' नीति को कानूनी रूप से लागू किया गया था।

श्री राउत ने कहा कि पुलिसकर्मी भी हाड़-मांस के इंसान हैं, जिनके पास परिवार और निजी जिंदगी है। लगातार लंबी ड्यूटी से उनका पारिवारिक जीवन तबाह हो रहा है और वे कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने माना कि आबादी और जनशक्ति की कमी के कारण वरिष्ठ अधिकारियों को मजबूरी में मौखिक आदेश देने पड़ते हैं, लेकिन फिर भी व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण होना जरूरी है।

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