बेंगलुरु , अगस्त 21 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय में कहा कि कांग्रेस के "करप्शन रेट कार्ड" अभियान की वजह से उसे 2023 के विधानसभा चुनावों में 40 सीटों का नुकसान हुआ जिससे राज्य में पार्टी की सरकार बदल गयी।
भाजपा के अधिवक्ता विनोद कुमार एम ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से दायर याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि मतदान से ठीक पहले के अहम दिनों में अखबारों में बार-बार विज्ञापन छापे गये, जिससे पार्टी को आरोपों का जवाब देने के लिए बहुत कम समय मिला।उन्होंने कहा, "विज्ञापन की वजह से हम 40 सीटें हार गये।"न्यायालय के यह पूछे जाने पर कि क्या विज्ञापनों के बिना भाजपा उन 40 सीटों पर जीत जाती, अधिवक्ता ने 'हाँ' में जवाब दिया। उन्होंने तर्क दिया कि मतदान से तीन दिन पहले छापे गये विज्ञापनों में ऐसे आरोप लगाये गये थे जिनमें "एक प्रतिशत भी" सच्चाई नहीं थी और पार्टी को मतदाताओं के सामने अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, "इस मानहानि वाले लेख के असर से सरकार बदल गयी। उन्हें इसे दोहराने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।"याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशि किरण शेट्टी ने इसी मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ कार्यवाही रद्द करने के उच्च न्यायालय के पिछले फैसले का हवाला दिया। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा याचिकाकर्ताओं को भी वही राहत मिलनी चाहिए।
भाजपा ने इस याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि मौजूदा मामला अलग है क्योंकि मानहानि वाली कथित सामग्री अखबार के विज्ञापनों के जरिए छापी गयी थी। श्री कुमार ने कहा कि अगर कांग्रेस का कहना है कि विज्ञापन "निष्पक्ष टिप्पणी" थे, तो इस बचाव की जांच सुनवाई के दौरान होनी चाहिए, न कि शुरुआती दौर में ही शिकायत को रद्द करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
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