नयी दिल्ली , जून 29 -- सरकार ने देश में एनीमिया से निपटने के प्रयासों को और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'एनीमिया मुक्त भारत अभियान' के लिए संशोधित परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने यहाँ आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की 16वीं बैठक के दौरान इन दिशानिर्देशों का विमोचन किया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने 'एनीमिया मुक्त भारत' कार्यक्रम का विस्तार करते हुए इसे अब 'एनीमिया मुक्त भारत अभियान' का स्वरूप दिया है। नए अभियान में केवल आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंट देने तक सीमित रहने के बजाय एनीमिया की जांच, उपचार, संतुलित पोषण, जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को भी समान महत्व दिया गया है।
उन्होंने कहा कि संशोधित दिशानिर्देशों के तहत अभियान को पहले के 6x6x6 मॉडल से बढ़ाकर 7x7x7 फ्रेमवर्क में बदल दिया गया है। इसमें कम वज़न वाले नवजात शिशुओं (0-6 माह) को सातवें लाभार्थी समूह के रूप में शामिल किया गया है। साथ ही आयरन युक्त एवं विविध आहार को बढ़ावा देने को नया हस्तक्षेप बनाया गया है तथा डिजिटल निगरानी एवं मूल्यांकन के लिए मजबूत संस्थागत तंत्र विकसित किया गया है।
अभियान में अब टी3(टेस्ट, ट्रीट, टॉक) रणनीति को आगे बढ़ाकर टी4(टेस्ट, ट्रीट, टॉक और ट्रैक) अपनायी गयी है। इसके तहत लाभार्थियों की जांच, उपचार, पोषण संबंधी परामर्श और उपचार के बाद नियमित फॉलो-अप की डिजिटल निगरानी सुनिश्चित की जायेगी। गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं में गंभीर एनीमिया के मामलों के लिए इंट्रावेनस आयरन थेरेपी (एफसीएम और आयरन सुक्रोज) को भी उपचार व्यवस्था में शामिल किया गया है।
सरकार ने एनीमिया से जुड़ी सेवाओं की डिजिटल ट्रैकिंग, विश्लेषण और योजना निर्माण के लिए एकीकृत 'एनीमिया मुक्त भारत अभियान पोर्टल' विकसित किया है। गर्भवती महिलाओं के हीमोग्लोबिन परीक्षण का रिकॉर्ड 'जननी' पोर्टल, बच्चों का डेटा आरबीएसके और यू -डब्ल्यूआईएन पोर्टल से एकीकृत होकर इस पोर्टल पर उपलब्ध होगा। इससे स्क्रीनिंग से लेकर उपचार और फॉलो-अप तक पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन निगरानी संभव होगी।
उन्होंने कहा कि अभियान के तहत देशभर में 'जन भागीदारी' पहल भी शुरू की जायेगी। इसका उद्देश्य एनीमिया को सामान्य समस्या मानने की सोच को बदलना तथा परिवारों और समुदायों को इसके प्रति जागरूक बनाकर सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के समन्वित प्रयासों से एनीमिया के खिलाफ अभियान को और गति मिलेगी।
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