रीवा , जनवरी 28 -- प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय, रीवा के भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में बुधवार को "एथिक्स एवं इंटिग्रिटी" विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. आर.एन. तिवारी ने की। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. संजय कुमार मिश्रा, डायरेक्टर, बाल भारती स्कूल, रीवा उपस्थित रहे, जबकि भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ. केशरकली तिवारी भी मंचासीन रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य, मुख्य वक्ता एवं संयोजक द्वारा देवी सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। छात्रा शिवानी पाण्डेय (बीएससी तृतीय वर्ष) ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके पश्चात मुख्य अतिथि एवं वक्ता का स्वागत पुष्पगुच्छ, शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।

स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य प्रो. डॉ. आर.एन. तिवारी ने शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण में नैतिक मूल्यों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने समाज और शिक्षित वर्ग में नैतिक मूल्यों के पतन पर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के केन्द्र में निहित शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आत्मिक विकास की अवधारणा को रेखांकित किया। सहायक प्राध्यापक (सांख्यिकी) शुभम मिश्रा ने मुख्य वक्ता का परिचय देते हुए बताया कि डॉ. संजय कुमार मिश्रा को शिक्षा, पर्यावरण एवं सामाजिक कार्यों के लिए 'उत्तराखण्ड रत्न' से सम्मानित किया जा चुका है।

मुख्य वक्ता डॉ. संजय कुमार मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विद्यार्थी जीवन में नैतिकता एवं अखंडता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, नैतिकता और अखंडता जैसे मूल्य चरित्र निर्माण की आधारशिला हैं तथा इनके विकास में विद्यालयों और महाविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अपने उद्बोधन के उपरांत उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद कर उनके प्रश्नों के सकारात्मक उत्तर दिए।

कार्यक्रम के अंत में सहायक प्राध्यापक (अंग्रेजी) डॉ. शिवनाथ कुमार शर्मा ने आभार ज्ञापन किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक (अंग्रेजी) डॉ. प्रीति विश्वकर्मा ने किया। इस अवसर पर सभागार में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्षों सहित बड़ी संख्या में शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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