बेंगलुरु , मई 17 -- लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने के केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी 'एक देश, एक चुनाव' प्रस्ताव पर जनता दल (सेक्युलर) ने चिंता जताते हुए इसे संवैधानिक और संघीय प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

पार्टी ने इस प्रस्ताव के कुछ विशिष्ट प्रावधानों में बदलाव की मांग की है। पार्टी का तर्क है कि हालांकि यह विचार प्रशासनिक दक्षता में सुधार और चुनावी खर्च को कम करने में मददगार हो सकता है, लेकिन इसे संघीय ढांचे या राज्यों की स्वायत्तता की कीमत पर लागू नहीं किया जा सकता।

पार्टी के इस रुख का पुरजोर समर्थन करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री और जद (एस) के वरिष्ठ नेता एच. डी. देवेगौड़ा ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए इस प्रस्ताव की और गहरी समीक्षा की आवश्यकता है कि इससे केंद्र और राज्यों के बीच का संवैधानिक संतुलन न बिगड़े। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि देश की संघीय प्रणाली लोकतंत्र का एक बुनियादी स्तंभ है और किसी भी चुनावी सुधार में राज्य सरकारों की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों का संरक्षण हर हाल में होना चाहिए।

जद(एस) नेताओं ने संकेत दिया है कि वर्तमान मसौदे में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं दिए गए हैं। विशेष रूप से ऐसी स्थितियां जब कोई राज्य विधानसभा समय से पहले भंग हो जाए, राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो जाए, या आपातकालीन हालात बन जाएं, तब क्या प्रक्रिया होगी? पार्टी के अनुसार, इस चुनावी बदलाव में ऐसे स्पष्ट सुरक्षा उपाय होने चाहिए जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि एक समान चुनाव चक्र के तहत राज्य सरकारों को राजनीतिक या प्रशासनिक रूप से कोई नुकसान न उठाना पड़े।

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