नयी दिल्ली , सितंबर 14 -- सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) और ब्रिटिश उच्चायोग के एक कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मौजूदा समय में एआई को जरूरी बताया, लेकिन साथ ही कुछ भी गलत होने की स्थिति के लिए मानवीय जिम्मेदारी पहले से तय होने की वकालत की।
"भारत के इंटेलिजेंट कनेक्टिविटी के भविष्य को सशक्त बनाना: नेटवर्क, भरोसा और आम लोगों के लिए एआई" विषय पर आयोजित सीओ.एआई 2026 के दौरान विभिन्न सत्रों में कई वक्ताओं ने इस मुद्दे को उठाया। ब्रिटिश उच्चायोग की क्षेत्रीय निदेशक (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) सोफिया नेस्टियस-बूथ ने कहा, "यदि कुछ गलत होता है कौन जिम्मेदार होगा? हम यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते कि यह एआई ने किया है। यदि पूरी प्रक्रिया में कोई इंसान शामिल नहीं है तब भी किसी न किसी को जिम्मेदारी लेनी होगी, चाहे वह कंपनी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी हो या एआई को बनाने वाले।"उन्होंने विनियमन को जरूरी बताते हुए कहा कि जब तरीका सही हो तो विनियमन नवाचार में सहायक होता है। उन्होंने कहा कि भारत इतना बड़ा देश है कि यहां साइबर सिक्योरिटी और एआई की दिशा पर पूरी दुनिया की नजर है।
कार्यक्रम में सीओएआई और ब्रिटिश उच्चायोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल कनेक्टिविटी, डिजिटल भरोसा और जिम्मेदार प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार पर सहयोग को मजबूत करने के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि एआई सिर्फ एक और नेटवर्क जेनरेशन या एप्लीकेशन लेयर नहीं है। यह एक ऐसी क्षमता है जो नेटवर्क के प्रबंधन, सेवा की डिजाइन, जोखिम की पहचान और फैसले लेने के तरीकों पर असर डाल सकती है। एआई से नये मौके तो मिलते हैं, लेकिन इसके लिए सही तरह प्रशासनिक पहल की भी जरूरत होती है। जैसे-जैसे यह सेक्टर आगे बढ़ रहा है, प्रशासन को कई लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाना होगा - जैसे निवेश को बढ़ावा देना, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, नवाचार को सक्षम बनाना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं की सुरक्षा करना।
भारत में ब्रिटेन के कार्यवाहक उच्चायुक्त बेन मेलर ने कहा कि सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सुरक्षा, जवाबदेही और मजबूती के साथ नवाचार आगे बढ़े। एआई समाधान का भी एक हिस्सा है - यह नुकसान के पैटर्न को जल्दी पहचानने में मदद कर सकता है। आज ब्रिटेन की भागीदारी का यही मकसद है, और इसीलिए यह एमओयू इतना अहम है।
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