रांची , जुलाई 18 -- झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) एवं एनटीपीसी लिमिटेड के संयुक्त उपक्रम पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) द्वारा शनिवार को रांची में द्वितीय ऐश यूज़र मीट-2026 का आयोजन किया गया।

"अपशिष्ट से समृद्धि तक : परिवर्तन की सशक्त एवं सतत यात्रा" विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, अवसंरचना विशेषज्ञों एवं फ्लाई ऐश उपयोगकर्ताओं ने भाग लेकर फ्लाई ऐश के नवाचारपूर्ण एवं सतत उपयोग की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन तथा कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबूबक्कर सिद्दीक पी. (आईएएस) थे। पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक कुमार सहगल ने सभी अतिथियों का शॉल एवं पौधा भेंट कर स्वागत किया।

सम्मेलन में राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) समिति के अध्यक्ष एवं हुडको के पूर्व अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक वी. सुरेश सहित भवन निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, जल संसाधन विभाग, सीपीडब्ल्यूडी, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, सीएसआईआर-सीआईएमएफआर, भारतीय रेल, आईसीएआर-आईएआरआई तथा विभिन्न सरकारी एवं औद्योगिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पीवीयूएनएल की उपलब्धियों, पर्यावरणीय पहलों तथा सतत ऐश उपयोग के विज़न पर आधारित विशेष स्मारिका का विमोचन किया गया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता के प्रतीक स्वरूप सभी विशिष्ट अतिथियों को फ्लाई ऐश से निर्मित स्मृति-चिह्न भी भेंट किए गए।

इस अवसर पर पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए. के. सहगल ने कहा कि फ्लाई ऐश को अब अपशिष्ट नहीं, बल्कि देश के लिए एक बहुमूल्य संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए, जो सतत अवसंरचना विकास और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि पीवीयूएनएल "ऐश टू एसेट" की अवधारणा को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। इसके तहत ड्राई बॉटम ऐश हैंडलिंग प्रणाली, एयर-कूल्ड कंडेंसर (एसीसी) तकनीक के माध्यम से जल संरक्षण तथा विभिन्न क्षेत्रों में फ्लाई ऐश के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को फ्लाई ऐश से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होने के साथ-साथ सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा मिल रहा है।

सम्मेलन के दौरान वी. सुरेश की अध्यक्षता में आयोजित तकनीकी सत्र में सतत निर्माण एवं अवसंरचना विकास में फ्लाई ऐश के उपयोग की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। सीएसआईआर-सीआईएमएफआर के आर. एभिन मस्तो ने फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक एवं नवाचारपूर्ण उपयोग पर प्रस्तुति दी, जबकि एनपीजीसी की वरिष्ठ प्रबंधक अपूर्व प्रकाश ने कार्बन मार्केट पर व्याख्यान देते हुए कार्बन उत्सर्जन में कमी और हरित अर्थव्यवस्था के नए अवसरों पर प्रकाश डाला। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के विशेषज्ञों ने भी फ्लाई ऐश के उपयोग से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर प्रस्तुति दी।

सम्मेलन में फ्लाई ऐश के अधिकतम उपयोग, पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकों को बढ़ावा देने, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा सरकारी विभागों, शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के बीच समन्वय को मजबूत बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम का समापन सभी हितधारकों द्वारा प्रौद्योगिकी, नवाचार और आपसी सहयोग के माध्यम से "अपशिष्ट से समृद्धि" के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर पीवीयूएनएल ने हरित, स्वच्छ एवं सतत भविष्य के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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