नयी दिल्ली , मार्च 13 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से देशभर में रसोई गैस की कमी को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है। पार्टी महासचिव एमए बेबी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यह संकट आबादी के एक बड़े हिस्से को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।
पार्टी के जारी पत्र में श्री बेबी ने कहा कि एलपीजी सिलेंडरों की कमी ने परिवारों, छात्रों, छोटे व्यवसायों और श्रमिकों के बीच व्यापक संकट पैदा कर दिया है। उन्होंने सरकार से पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और कालाबाजारी पर नकेल कसने का आह्वान किया।
श्री बेबी ने पत्र में लिखा है, "रसोई गैस की कमी के कारण हमारी आबादी के एक बड़े हिस्से को प्रभावित करने वाले इस गंभीर संकट की ओर आपका ध्यान आकर्षित कराने के लिए गहरे दुख के साथ मैं यह पत्र लिख रहा हूं।"उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बाहरी झटकों से देश को बचाने के लिए पर्याप्त भंडार बनाये रखने में विफल रही है। उन्होंने आपूर्ति में आये इस व्यवधान को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के चल रहे संघर्ष से जोड़ते हुए कहा कि युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को अस्थिर कर दिया है। उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि सरकार पर्याप्त गैस भंडार सुनिश्चित करने में विफल रही है, जो ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध और उसके परिणामस्वरूप आपूर्ति शृंखला में आये व्यवधानों के कारण पैदा हुए बाहरी झटकों और अस्थिरता से देश के हितों की रक्षा कर सके।"श्री बेबी ने सब्सिडी वाले और गैर-सब्सिडी वाले, दोनों श्रेणियों में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हुई वृद्धि की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इससे पहले से ही महंगाई से जूझ रहे परिवारों पर बोझ और बढ़ गया है। उनके अनुसार, कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को रिफिल के लिए लंबी कतारों में इंतजार करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि कालाबाजारी करने वाले इस स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने सरकार से जमाखोरी और सिलेंडरों की अवैध बिक्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और वास्तविक उपभोक्ताओं के लिए उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए कहा, "घरेलू खपत के लिए बनाये गये गैस सिलेंडर काले बाजार में 1,500 रुपये से 4,000 रुपये तक की दरों पर बेचे जा रहे हैं।"माकपा नेता ने कहा कि इस किल्लत का असर शैक्षणिक संस्थानों, विशेष रूप से उन छात्रावासों पर भी पड़ रहा है जो भोजन तैयार करने के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं।
श्री बेबी ने कहा, "रसोई गैस की किल्लत के कारण कई छात्रावासों ने अपने भोजन के मेनू में कटौती कर दी है। छात्रों को भरपेट भोजन के बजाय केवल दाल या सब्जी परोसी जा रही है। कुछ स्थानों पर तो छात्रावासों को बंद कर दिया गया हैं और छात्रों को घर लौटने को कहा गया है।" उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति छात्रों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
उन्होंने कहा कि रसोई गैस की आपूर्ति कम होने से रेस्तरां, ऑफिस कैंटीन और फूड डिलीवरी कर्मचारी भी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। श्री बेबी ने लिखा, "फूड डिलीवरी पर निर्भर 'गिगकर्मी' अपनी नौकरियां खो रहे हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि खाना पकाने के वैकल्पिक विकल्पों जैसे इंडक्शन स्टोव, इलेक्ट्रिक कुकर और यहां तक कि जलावन के इस्तेमाल में आने वाली लकड़ी की कीमतों में भी भारी उछाल आया है।
पत्र में खाद्य तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों की ओर भी इशारा किया गया है। इसमें कहा गया है कि मुद्रास्फीति (महंगाई) और ऊर्जा की कमी के दोहरे प्रभाव ने गरीब परिवारों को भुखमरी की कगार पर धकेल दिया है, जबकि मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
श्री बेबी ने दावा किया कि एलपीजी की कमी के कारण कुछ स्थानों पर गैस आधारित श्मशान घाटों को भी अपना संचालन रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
अपने पत्र में माकपा नेता ने प्रधानमंत्री से तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है। इसमें कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, छात्रावासों को निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना, खाद्य तेल की कीमतों को नियंत्रित करना, संकट से प्रभावित गिगकर्मियों को मुआवजा देना और छोटे रेस्तरां मालिकों की रक्षा करना शामिल है।
उन्होंने सरकार से अपनी विदेश नीति के रुख पर पुनर्विचार करने और ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई की औपचारिक रूप से निंदा करने का भी आह्वान किया। 2003 के इराक आक्रमण का उल्लेख करते हुए श्री बेबी ने याद दिलाया कि जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब भारतीय संसद ने सर्वसम्मति से इराक पर हमले की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया था।
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