कोलकाता , मई 27 -- पश्चिम बंगाल सरकार के संदिग्ध घुसपैठियों के लिए जिला स्तर पर 'होल्डिंग सेंटर' बनाने के फैसले के बाद हिरासत में लेने के बढ़ते डर के बीच बुधवार को भी पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर सीमा नाके पर सैकड़ों बंगलादेशी नागरिकों की भीड़ जमा देखी गयी है।

बशीरहाट अनुमंडल के स्वरूपनगर इलाके में आने वाली इस सीमा पर तड़के से ही एक दिन पहले जैसे नजारे देखने को मिले। यहां लोग बंगलादेश सीमा पार करने के मौके के इंतजार में बैग, ट्रॉली और अपना दूसरा साजो-सामान लेकर लंबी कतारों में खड़े थे। प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि बुधवार दोपहर तक करीब 35 से 40 लोग अब भी सीमा के पास इंतजार कर रहे थे, जबकि आस-पास के इलाकों से और अधिक लोगों के आने की रिपोर्टें मिल रही थीं। वहां जुटे लोगों में से कई ने यह बात स्वीकार की कि वे पिछले कुछ वर्षों में एजेंटों और दलालों की मदद से अवैध रूप से भारत में घुसे थे और देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे थे। अब संभावित गिरफ्तारी या हिरासत के डर से वे खुद अपनी मर्जी से बंगलादेश लौटने की कोशिश कर रहे हैं।

स्थानीय सूत्रों ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों और पुलिस प्रशासन का मंगलवार को हकीमपुर सीमा के पास 200 से अधिक संदिग्ध घुसपैठियों से सामना हुआ था। रिपोर्टों के मुताबिक, डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले, कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए उन्हें इलाके के तीन अस्थायी होल्डिंग सेंटरों में भेजा गया था। नाके के पास इंतजार कर रहे लोग अस्थायी शेडों के नीचे शरण लेते दिखायी दिये, जबकि अन्य लोगों ने सीमा पार करने की अनुमति मिलने का इंतजार करते हुए सड़कों के किनारे और खुले स्थानों पर प्लास्टिक की चादरें बिछा रखी थीं। पिछले साल अक्टूबर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान भी ऐसे ही नजारे देखने को मिले थे।

ताजा घटनाक्रम राज्य सरकार के उस हालिया निर्देश की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसमें संदिग्ध घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को हिरासत में रखने के लिए हर जिले में 'होल्डिंग सेंटर' बनाने की बात कही गयी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन केंद्रों में लोगों को 30 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है। जिन लोगों के खिलाफ पहले से ही कानूनी कार्रवाई चल रही है या जो डिपोर्ट होने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें भी इन्हीं केंद्रों में रखा जायेगा।

रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार के इस कदम से कई सीमावर्ती जिलों में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे निवासियों के बीच डर पैदा हो गया है, जिसके चलते गहन सत्यापन अभियान शुरू होने से पहले ही कई लोग खुद अपनी मर्जी से देश छोड़कर जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घुसपैठ पर प्रशासन के कड़े रुख ने पलायन को और तेज कर दिया है। कल्याणी के एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में मंगलवार को आयोजित एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए सरकार की थ्रीडी 'डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट' की नीति को दोहराया।

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