नयी दिल्ली , अप्रैल 03 -- होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों में तेजी के बीच हजारों फंसे नाविकों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, जबकि देशों का ध्यान अब भी ऊर्जा सुरक्षा पर अधिक केंद्रित है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने नाविकों की सुरक्षा और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए "तत्काल और समन्वित वैश्विक कूटनीतिक प्रयासों" की अपील की है।
आईएमओ के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद अब तक वाणिज्यिक जहाजों पर 21 हमले हो चुके हैं, जिनमें कम से कम 10 नाविकों की मौत हो चुकी है और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। करीब 20,000 चालक दल के सदस्य अब भी क्षेत्र में जहाजों पर फंसे हुए हैं, जहां उन्हें खाद्य सामग्री की कमी, थकान और मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
इस बीच 40 से अधिक देशों के विदेश मंत्रियों को स्थिति की जानकारी एक वर्चुअल बैठक में दी गई। बैठक की मेजबानी ब्रिटेन फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस ने की।
आईएमओ प्रमुख ने फंसे हुए नाविकों की सुरक्षित निकासी और "मानवीय गलियारों" के निर्माण के लिए तत्काल कूटनीतिक पहल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सभी पक्षों से समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने और नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की।
आईएमओ तटीय देशों के साथ मिलकर सुरक्षित क्रू रोटेशन, फंसे जहाजों की रिहाई और पर्यावरणीय जोखिमों को रोकने के लिए एक समुद्री निकासी ढांचा तैयार कर रहा है। इसके साथ ही बीआईएमसीओ और इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग जैसे उद्योग संगठनों के साथ समन्वय भी बढ़ाया जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स भी बनाई गई है, जिसका नेतृत्व श्री जॉर्ज मोरेइरा दा सिल्वा कर रहे हैं, ताकि क्षेत्र में मानवीय और तकनीकी चुनौतियों से निपटा जा सके।
आईएमओ परिषद ने जहाजों पर हो रहे हमलों और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के प्रयासों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही सदस्य देशों से समन्वित और प्रभावी सुरक्षा उपाय अपनाने का आह्वान किया गया है।
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