न्यूयॉर्क , सितंबर 26 -- ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने कहा है कि उनका देश अमेरिका के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने के उद्देश्य से पेश किए गए प्रस्ताव के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को ईरान में प्रवेश की अनुमति देने के लिए तैयार है।
'सीबीएस न्यूज' के कार्यक्रम 'फेस द नेशन' को दिए एक साक्षात्कार में श्री पेज़ेशकियान ने कहा कि अगर अमेरिका रणनीतिक जलमार्ग को दोबारा खोलने और परमाणु वार्ता बहाल करने के ईरान के नए प्रस्ताव पर हामी भरता है, तो ईरान "अपनी प्रतिबद्धताओं का पूरी तरह से पालन करेगा।"इससे पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस सप्ताह प्रस्ताव दिया था कि व्यापक परमाणु समझौते की दिशा में शुरुआती कदम के रूप में अमेरिका के साथ बातचीत शुरू होने के सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर घोषित इस प्रस्ताव पर अमेरिका की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से सीधी मुलाकात की संभावना पर श्री पेज़ेशकियान ने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूद "अविश्वास के माहौल" के कारण ऐसा होना कठिन है। उन्होंने कहा, "जब तक वे हम पर रोजाना की जा रही कार्रवाइयों को बंद नहीं करते, उन पर भरोसा करना मुश्किल है। वे रोज हम पर प्रतिबंध बढ़ाते हैं, धमकियां देते हैं और हमले करते हैं। जो बातें लिखित में तय होती हैं, वे उनका भी पालन नहीं करते। ऐसे में अगर वे बातचीत करते हैं, तो क्या वे वाकई उसका पालन करेंगे?"हालांकि श्री ट्रम्प ने अपनी न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान ईरानी अधिकारियों से मिलने की इच्छा जताई थी, लेकिन कोई प्रत्यक्ष बैठक नहीं हुई और दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के माध्यम से अप्रत्यक्ष संपर्क ही बना रहा। श्री पेज़ेशकियान ने कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ जून में हुए समझौते के ज्ञापन पर लौटने का इच्छुक है। उन्होंने इस बात का भी स्वागत किया कि चीन इस समझौते को बहाल करना चाहता है।
इससे पूर्व संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में श्री पेज़ेशकियान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि ईरान अमेरिका के आगे "घुटने नहीं टेकेगा", लेकिन बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध जारी नहीं रखना चाहता और इसे समाप्त करना अमेरिका पर निर्भर करता है।
इसी बीच, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों को प्रवेश देने के सवाल पर श्री पेज़ेशकियान ने स्पष्ट रूप से कहा, "यह बिल्कुल सही है।" उन्होंने दोहराया कि अगर वार्ता के दौरान निरीक्षण पर सहमति बनती है, तो ईरान उसका पालन करेगा। इसके साथ ही उन्होंने फिर दोहराया कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करना चाहता, क्योंकि "परमाणु हथियार बनाना हराम है", इसकी इस्लाम में पाबंदी है।
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