सिंगापुर/टोक्यो , मार्च 02 -- ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों से शुरू हुए युद्ध के मद्देनजर पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के बीच सोमवार को तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गयी।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों और मार्ग के प्रभावी रूप से बाधित होने की खबरों ने बाजारों को झटका दिया।

एशिया में शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया, जबकि शुक्रवार को इसका बंद भाव 72.87 डॉलर था। बाद में कीमत कुछ नरम होकर 79 डॉलर से नीचे आ गयी।

शेयर बाजारों में जापान का निक्केई सूचकांक शुरुआती कारोबार में 2.2 प्रतिशत गिरा, जबकि सिडनी का बाजार 0.5 प्रतिशत नीचे रहा। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में दो प्रतिशत की तेजी दर्ज की गयी।

विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से वैश्विक समुद्री तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्से का आवागमन होता है। ईरान ने औपचारिक रूप से मार्ग बंद करने की घोषणा नहीं की है, लेकिन उसकी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस मार्ग से गुजरने के खिलाफ चेतावनी दी है। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ के अनुसार, रविवार को ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के तट के पास दो जहाजों को निशाना बनाया गया।

ईरानी सरकारी टेलीविजन ने कहा कि एक तेल टैंकर पर हमला हुआ और वह डूब रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में बीमा लागत अत्यधिक बढ़ जाती है। मुख्य शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग से अपने बेड़े के आवागमन को निलंबित करने की पुष्टि की है। विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि जलडमरूमध्य मार्ग बंद होता है तो प्रतिदिन 80 से 100 लाख बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

तेल आयातक देशों के पास भंडार मौजूद हैं। ओईसीडी देशों के लिए 90 दिन का अनिवार्य भंडारण प्रावधान है, लेकिन कीमतों के 100 डॉलर से ऊपर जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

कतर तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का प्रमुख निर्यातक है, ऐसे में गैस की कीमतों में भी तेजी की संभावना है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। पिछली बार तेल 100 डॉलर से ऊपर यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में गया था, जब ऊर्जा कीमतों में उछाल से वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ी थी।

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