हैदराबाद , जनवरी 19 -- तेलंगाना में स्थानीय निधि लेखा (एलएफए) के निदेशालयों और राज्य लेखा परीक्षा विभागों के लिए तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला सोमवार को यहां राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर ) में शुरू हुई।
एनआईआरडीपीआर के ग्रामीण विकास में आंतरिक लेखा परीक्षा केंद्र (सीआईएआरडी ) के तत्वाधान में अंतरराष्ट्रीय स्थानीय शासन लेखा परीक्षा केंद्र (आईसीएएल ) के सहयोग तथा भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैस ) के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला 21 जनवरी तक चलेगी। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य और स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभागों की क्षमताओं को मजबूत करना और देश भर में पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) और शहरी स्थानीय निकायों में लेखा परीक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता, एकरूपता और प्रभाव को बढ़ाना है।
एनआईआरडीपीआर के महानिदेशक डॉ. जी नरेंद्र कुमार ने स्थानीय सरकारों में जवाबदेही, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने में स्थानीय निधि लेखाकारों और राज्य ऑडिट विभागों की भूमिका का उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने विशेष तौर पर 15वें वित्त आयोग के तहत निधि प्रवाह में बढ़ोतरी का उल्लेख किया। क्षमता निर्माण और राज्यों के बीच सीखने के आदान-प्रदान के माध्यम से आम लेखा चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी, कृत्रिम बुद्धिमता और कंप्यूटर-सहायता प्राप्त लेखा उपकरण एवं तकनीक (कैट) को ज़्यादा अपनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने स्थानीय शासन के लिए लेखा प्रणाली को मजबूत करने में राज्यों को सहायता देने के लिए एनआईरडीपीआर की प्रतिबद्धता को दोहराया।
वहीं, उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (स्थानीय सरकार ऑडिट) मनीष कुमार ने पीआरआई और शहरी स्थानीय निकायों में ऑडिट के संवैधानिक जनादेश को रेखांकित किया और पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में स्थानीय निधि लेखा की भूमिका पर जोर दिया।
पंचायती राज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को मजबूत करने और स्थानीय सरकार स्तर पर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में मजबूत ऑडिट तंत्र के महत्व को रेखांकित किया।
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