नयी दिल्ली/हैदराबाद , मार्च 20 -- अंतर्राष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र, पाउडर धातु विज्ञान और नयी सामग्री (एआरसीआई) में एनडी-एफई-बी (नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन) दुर्लभ पृथ्वी स्थायी मैग्नेट के निर्माण के लिए अत्याधुनिक पायलट प्लांट स्थापित किया गया है।
यह संस्थान विज्ञान एवं प्रोद्यौगिक विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत कार्य करता है।
इस पायलट प्लांट का उद्घाटन डीएसटी के सचिव अभय करंदीकर ने किया। इस अवसर पर एआरसीआई के निदेशक आर. विजय, पूर्व डीएसटी सचिव आशुतोष शर्मा सहित कई वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि और शोधकर्ता उपस्थित रहे।
उद्घाटन समारोह में वक्ताओं ने इस पहल को भारत के लिए एक रणनीतिक उपलब्धि बताया। पायलट प्लांट कच्चे मिश्र धातु से लेकर तैयार मैग्नेट तक की पूरी निर्माण प्रक्रिया को कवर करता है, जिससे देश में एक मजबूत और आत्मनिर्भर विनिर्माण तंत्र विकसित होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, एनडी-एफई-बी मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत औद्योगिक तकनीकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में इन मैग्नेट की वैश्विक आपूर्ति सीमित देशों में केंद्रित है, जिससे भारत जैसे देशों के लिए आपूर्ति जोखिम बना रहता है।
इस मौके पर प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि यह प्लांट महत्वपूर्ण सामग्रियों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा। उन्होंने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इस पहल को अहम बताया। उन्होंने कहा कि पायलट प्लांट न केवल तकनीकी परीक्षण और प्रक्रिया सुधार के लिए उपयोगी होगा, बल्कि उद्योगों, स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों के बीच सहयोग को भी बढ़ावा देगा। इससे स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायीकरण और बड़े पैमाने पर उत्पादन को गति मिलने की उम्मीद है।
एआरसीआई के निदेशक डॉ. आर. विजय ने बताया कि संस्थान 'मिनरल-टू-मार्केट' मॉडल पर काम कर रहा है, जिससे कच्चे संसाधनों से लेकर तैयार उत्पाद तक की पूरी श्रृंखला देश में विकसित की जा सके।
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