हैदराबाद , अक्टूबर 31 -- भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और आईसीएफएआई हायर एजुकेशन फाउंडेशन के चांसलर डॉ. सी. रंगराजन ने शनिवार को वैश्विक अनिश्चितताओं से भारतीय अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को मजबूत करने, आवश्यक वस्तुओं के भंडार का निर्माण करने और आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने का आह्वान किया।
यहाँ आईएफएचई के 16वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल को अंधाधुंध आयात प्रतिस्थापन के बजाय वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की सेवा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
अमेरिका के एकतरफा आयात शुल्क और अमेरिका-इजरायल/ईरान संघर्ष का जिक्र करते हुए श्री रंगराजन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली के दो मुख्य स्तंभ आयात शुल्क दरों पर आम सहमति और समुद्री मार्गों से वस्तुओं की स्वतंत्र आवाजाही कमजोर हुए हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया "जिसकी लाठी उसकी भैंस" के दौर की ओर बढ़ रही है। इसे ध्यान में रखकर भारत को उभरती हुई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी विकास रणनीति को फिर से तैयार करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने, संरचनात्मक सुधार करने, भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे में निवेश करने तथा ज्ञान और नवाचार को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया।
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