ऋषिकेश , मई 20 -- उत्तराखंड के ऋषिकेश से सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुण्ड साहिब की वार्षिक यात्रा का शुभारंभ बुधवार को श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक माहौल के बीच हुआ। गुरुद्वारा श्री हेमकुण्ड साहिब से पंच प्यारों की अगुवाई में संगत को हरि झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू तथा स्वामी चिदानन्द सरस्वती मुख्य रूप से मौजूद रहे।

कार्यक्रम में गुरबाणी की मधुर स्वर लहरियों और "जो बोले सो निहाल" के जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों एवं ने अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर संगत का अभिनंदन किया तथा अरदास के बाद यात्रा दल को रवाना किया गया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि हेमकुण्ड साहिब केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि तप, त्याग, सेवा और साहस की प्रतीक भूमि है। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह के जीवन और बलिदान को सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उनका जीवन धर्म, न्याय और मानवता की रक्षा का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में गुरु साहिब का संदेश समाज को एकता, निर्भयता और सद्भाव की राह दिखाता है।

दिल्ली के उपराज्यपाल संधू ने कहा कि हेमकुण्ड साहिब यात्रा भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जहां आध्यात्मिकता और वीरता साथ-साथ चलती हैं। उन्होंने गुरु तेग बहादुर और गुरु गोबिंद सिंह जी के बलिदानों को स्मरण करते हुए कहा कि उनका त्याग देश और मानवता के इतिहास में सदैव अमर रहेगा।

इस दौरान स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्रजीत बिन्द्रा ने उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू को रुद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट कर उनका अभिनंदन किया। वक्ताओं ने सिख गुरुओं एवं साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान को भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

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