अदन , अक्टूबर 15 -- यमन की विदेश मंत्री अफराह अल-जुबा ने गुरुवार को कहा कि सरकार ईरान समर्थित हूती विद्रोही समूह के साथ युद्धविराम या बातचीत की इच्छुक नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि विद्रोहियों को अपनी सैन्य क्षमताएं बढ़ाने के लिए और समय देने से उन्हें हराना मुश्किल हो जाएगा।
सुश्री अल-जुबा ने ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले युद्धविरामों का इस्तेमाल हूतियों ने दोबारा संगठित होने, हथियार जुटाने और नए हमले करने के लिए किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी संघर्ष विराम या राजनीतिक प्रक्रिया के लिए ऐसी शर्तें जरूरी होंगी, जिनसे स्थायी परिणाम सुनिश्चित हो सकें।
उन्होंने सऊदी अरब और यमन में हूती मिसाइल एवं ड्रोन हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन हमलों में 13 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक घायल हुए हैं। उनके अनुसार, हूती अब यमन के आंतरिक संघर्ष से आगे बढ़कर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं।
विदेश मंत्री ने ईरान पर हूतियों को हथियार, धन, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लाल सागर क्षेत्र, अफ्रीका के हॉर्न और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों तक इस खतरे का विस्तार हो रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के एक पैनल के निष्कर्षों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि हूती लड़ाकों ने सोमालिया जाकर अल-शबाब के सदस्यों को विस्फोटक, ड्रोन में बदलाव और हथियारों के रखरखाव का प्रशिक्षण दिया।
सुश्री अल-जुबा ने बताया कि यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के प्रमुख राशद अल-अलीमी के चार अक्टूबर के आदेश के बाद 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' चला रही है। उन्होंने कहा कि अभियान संयुक्त कमान के तहत संचालित हो रहा है और गठबंधन सहयोगी हवाई सहायता दे रहे हैं। सरकार ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास महत्वपूर्ण तटीय क्षेत्रों पर फिर नियंत्रण हासिल करने का दावा किया है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। ताइज, मारिब और होदेइदाह सहित कई क्षेत्रों में लड़ाई जारी है।
विदेश मंत्री ने हूतियों पर 2022 से लागू संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन करने, दो हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें जमा करने और तेल-गैस निर्यात सुविधाओं पर हमले करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ताइज की घेराबंदी से मानवीय संकट और गंभीर हो गया है। पानी, ईंधन और भोजन की आपूर्ति बाधित होने से सैकड़ों गुर्दा रोगियों को अगले एक-दो सप्ताह में डायलिसिस की सुविधा से वंचित होना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि सरकार स्वास्थ्य एवं जल सुविधाओं के लिए ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस समिति से बातचीत कर रही है। खाद्य और जल आपूर्ति के लिए निजी कंपनियों से भी चर्चा की जा रही है।
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