बैतूल , जून 20 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी विकासखंड के पुनर्वास क्षेत्र में बसी हीरापुर ग्राम पंचायत इन दिनों अपनी अनूठी पहचान के कारण चर्चा में है। करीब 5500 की आबादी वाला यह गांव सिर्फ 95 प्रतिशत साक्षरता दर के लिए ही नहीं, बल्कि रेशम उद्योग, आधुनिक खेती और सामाजिक समरसता के अनोखे संगम के लिए भी मिसाल बन गया है। कभी सामान्य ग्रामीण क्षेत्र के रूप में पहचाना जाने वाला हीरापुर आज आत्मनिर्भरता और विकास की नई इबारत लिख रहा है।

जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित इस ग्राम पंचायत की पहचान उसके रेशम उत्पादन केंद्र से है। यहां ककून से निकाला जाने वाला उच्च गुणवत्ता का रेशम धागा अब केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के बड़े टेक्सटाइल केंद्रों तक पहुंच रहा है। केंद्र में इन दिनों रेशम उत्पादन का काम पूरे जोर-शोर से चल रहा है। अनुकूल परिस्थितियों में यहां सालाना लगभग एक हजार किलोग्राम तक रेशम धागे का उत्पादन होता है। यही वजह है कि हीरापुर को अब क्षेत्र में "रेशम गांव" के नाम से भी पहचाना जाने लगा है।

खेती के क्षेत्र में भी हीरापुर ने नई राह दिखाई है। पूरे पुनर्वास क्षेत्र में सबसे पहले आधुनिक तरीके से तरबूज की खेती की शुरुआत यहीं के किसानों ने की थी। आज पंचायत में लगभग 25 हेक्टेयर क्षेत्र में तरबूज की फसल लहलहा रही है। किसानों को एक सीजन में चार से छह लाख रुपए तक का मुनाफा मिल रहा है। वहीं धान उत्पादन में भी यहां के किसानों ने रिकॉर्ड कायम किया है। पांच एकड़ भूमि में करीब 100 क्विंटल तक धान उत्पादन लेकर किसान नई मिसाल पेश कर रहे हैं।

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए पंचायत में विशेष प्रयास किए गए हैं। स्थानीय महिलाओं को प्रसिद्ध महेश्वरी पैटर्न की साड़ियां और वस्त्र बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इस पहल ने कई महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया है।

हीरापुर की सबसे बड़ी ताकत इसकी सामाजिक एकता है। वनग्राम हीरापुर, हीरापुर-1, हीरापुर-2, गोलई और कटासुर गांवों से मिलकर बनी इस पंचायत में बंगला भाषी और आदिवासी समुदाय वर्षों से आपसी भाईचारे के साथ रह रहे हैं। यही सामाजिक सौहार्द यहां के विकास की मजबूत नींव बना है।

सांस्कृतिक रूप से भी हीरापुर बेहद समृद्ध है। दुर्गा पूजा, काली पूजा, सरस्वती पूजा, चैत्र नवरात्रि और मकर संक्रांति जैसे पर्व यहां पूरे उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। चंडी माई का मेला पूरे पुनर्वास क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां हजारों लोग जुटते हैं।

रेशम के धागों से उद्योग, खेतों में आधुनिक खेती, महिलाओं का सशक्तिकरण और समुदायों के बीच अद्भुत सामंजस्य-हीरापुर आज साबित कर रहा है कि यदि इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास हो तो एक गांव भी विकास का ऐसा मॉडल बन सकता है, जो पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन जाए।

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