शिमला , सितंबर 03 -- हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने विपक्ष के विरोध के बीच गुरुवार को हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया।
विधेयक में अतिक्रमणकर्ता के परिवार की परिभाषा का विस्तार करते हुए उसमें बहू को भी शामिल किया गया है। इसके तहत पंचायत चुनाव लड़ने की पात्रता निर्धारित करते समय अतिक्रमण से जुड़े मामलों में बहू भी परिवार के दायरे में आएगी।
संशोधित प्रावधानों के तहत सरकारी, नगरपालिका, पंचायत, सहकारी समिति या गांव की शामलात भूमि पर अतिक्रमण करने वाला व्यक्ति तथा ऐसे अतिक्रमण से लाभान्वित होने वाले उसके परिवार के सदस्य पंचायत सदस्य निर्वाचित होने या पंचायत का कोई पद धारण करने के लिए अयोग्य होंगे। संशोधन के तहत परिवार की परिभाषा में दादा, दादी, पिता, माता, पति या पत्नी, पुत्र, अविवाहित पुत्री और बहू को शामिल किया गया है। यदि किसी व्यक्ति या उसके परिवार के किसी सदस्य ने सरकारी या पंचायत भूमि पर अतिक्रमण किया है, तो संबंधित व्यक्ति के बेदखल किए जाने या अतिक्रमण हटाए जाने की तारीख से छह वर्ष तक यह अयोग्यता प्रभावी रहेगी।
विधेयक का विरोध करते हुए भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने सवाल उठाया कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक एक दिन पहले इस कानून को लाने की क्या जरूरत थी। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक करार देते हुए आरोप लगाया कि अतिक्रमण से किसी तरह का संबंध नहीं रखने वाली महिलाओं को भी चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है।
श्री शर्मा ने सवाल किया कि ससुराल वालों द्वारा कथित तौर पर किए गए अतिक्रमण के लिए बहू को दंडित करने का औचित्य क्या है।
विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि इस संशोधन के कारण परिवारों को विवाह तय करने से पहले यह जांचना पड़ सकता है कि भावी दूल्हे के परिवार ने सरकारी या पंचायत की जमीन पर अतिक्रमण तो नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रावधान से अतिक्रमण से सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं रखने वाली महिलाओं को भी उनके चुनावी अधिकार से वंचित किया जा सकता है। श्री ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया के दौरान अध्यादेश लाना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रावधान एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता की बहू को चुनाव लड़ने से रोकने के उद्देश्य से लाया गया है और विधेयक वापस लेने की मांग की।
ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विपक्ष से स्पष्ट करने को कहा कि वह अतिक्रमणकारियों के साथ है या उनके खिलाफ। उन्होंने कहा कि सरकार के सामने ऐसे कई मामले आये हैं, जिनमें अतिक्रमण के कारण चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराए गए लोगों ने इसके बजाय अपनी बहुओं को चुनाव मैदान में उतारने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि यदि बहू अपने पति के परिवार की संपत्ति की कानूनी उत्तराधिकारी है तो वह उस संपत्ति और उससे जुड़ी देनदारियों में भी हिस्सेदार होती है। इसलिए परिवार की परिभाषा में उसे शामिल करना उचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संशोधन किसी विशेष व्यक्ति को ध्यान में रखकर नहीं किया गया है और सरकार ने कानूनी राय लेने के बाद यह निर्णय किया है।
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