शिमला , मई 28 -- हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े शिक्षकों और कर्मचारियों ने सरकार द्वारा बिना किसी पूर्व सलाह के लागू की गई वेतन कटौती, ग्रेड पे में बदलाव और सेवा नियमों में संशोधनों का कड़ा विरोध किया है।
चिकित्सा और दंत चिकित्सा महाविद्यालय शिक्षक राज्य संघ (एसएएमडीसीओटी) ने अपने एक बयान में आरोप लगाया कि हितधारकों से सलाह-मशविरा किए बिना कई बड़े फैसले थोपे गए, जिससे स्वास्थ्य सेवा शिक्षा प्रणाली में बड़े पैमाने पर लोगों का हौसला टूटा है।
एसएएमडीसीओटी के अध्यक्ष डॉ. बलबीर वर्मा ने कहा कि मुख्य चिंताओं में बिना किसी वजह के छुट्टियां कम करना, वेतन को 54,000 रुपये प्रति महीने से घटाकर 33,000 रुपये करना, गैर-प्रैक्टिसिंग भत्ता (एनपीए) वापस लेना, 4-9-14 स्केल और पीजी भत्ता बंद करना और विशेष अवकाश को 21 दिन से घटाकर आठ दिन करना शामिल हैं।
संघ ने सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) सम्मेलन में शामिल होने के लिए यात्रा भत्ता और महंगाई भत्ता (टीए/डीए) वापस लेने पर भी एतराज जताया और आरोप लगाया कि लोक सेवा आयोग के साक्षात्कार से चुने गए उम्मीदवार को दो साल तक बतौर प्रशिक्षु काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
संघ ने कहा कि हितधारकों के साथ सही बातचीत के बिना बार-बार लिए गए फैसले स्वास्थ्य शिक्षा क्षेत्र में अनिश्चितता, पक्षपात और प्रशासनिक अव्यवस्था को बढ़ावा दे रहे हैं।
एसएएमडीसीओटी ने सरकार से फैसलों की तुरंत समीक्षा करने की अपील करते हुए लोक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने के लिए हितधारकों के साथ ईमानदारी बरतने की मांग की।
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