शिमला , जुलाई 17 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार ने 'बाजार हस्तक्षेप योजना' (एमआईएस) के तहत सेब किसानों के लंबित भुगतानों को चुकाने के लिए 45 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही पूरी खरीद प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए एक समर्पित वेबसाइट और मोबाइल ऐप की शुरुआत की है।
यहां उद्यानिकी विभाग की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022, 2023, 2024 और 2025 के दौरान बाजार हस्तक्षेप योजना के अंतर्गत खरीदे गए सेब के लिए किसानों को भुगतान कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत 30 बोरी तक सेब की आपूर्ति करने वाले बागवानों को उनका भुगतान पहले ही मिल चुका है, जबकि 100 या उससे अधिक बोरी की आपूर्ति करने वालों के बकाया जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने लंबित देनदारियों के निबटाने के लिए 45 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
चालू सीजन के दौरान सेब खरीद की तैयारियों की समीक्षा करते हुए श्री सुक्खू ने वेबवाइट और मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह सुविधा सेब की खरीद से लेकर उनके प्रसंस्करण तक, पूरी प्रक्रिया की शुरू से अंत तक की डिजिटल रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस डिजिटल मंच से खरीद प्रणाली में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही में सुधार होगा।
इस वेबसाइट पर सेब किसानों को आधार कार्ड नंबर, भूमि रिकॉर्ड और बैंक खाते की जानकारी देकर इस पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। यह मंच बागवानों को खरीद केंद्रों पर अपनी उपज बेचने के लिए समय निर्धारित करने की सुविधा भी देगा, जिससे फसल कटाई के व्यस्त सीजन के दौरान प्रतीक्षा समय कम होगा और सुचारू संचालन सुनिश्चित होगा। इसके अलावा सेब खरीद की समय-सारणी और भुगतान की स्थिति के संबंध में मैसेज भेजा जाएगा जिससे वे वास्तविक समय में पूरी प्रक्रिया पर नजर रख सकेंगे।
श्री सुक्खू ने उद्यानिकी विभाग को निर्देश दिया कि खरीद सीजन के दौरान किसानों की सहायता के लिए संग्रह केंद्रों पर पर्याप्त कर्मचारी तैनात किए जाएं। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हो तो अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारियों को भी काम सौंपा जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को सभी तैयारियां समय से बहुत पहले पूरी करने का निर्देश दिया ताकि बागवानों को किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े।
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