शिमला , फरवरी 23 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की शिमला इकाई ने जल, कूड़ा और संपत्ति कर की दरों में वार्षिक वृद्धि के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू करने का निर्णय लिया है। ये दरें एक अप्रैल से प्रभावी होंगी।

शिमला जिला इकाई के सचिव विजेंद्र मेहरा ने सोमवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नागरिक जल, कूड़ा और संपत्ति करों में 10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की बार-बार होने वाली बढ़ोतरी से शिमला शहर के हर आम परिवार का बजट बिगड़ने की संभावना है।

उन्होंने कहा, "लोग अधिक कर दे रहे हैं लेकिन बदले में उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। नागरिक निकायों और राज्य सरकार के एकत्र किए अधिकांश करों को प्रतिबद्ध देनदारियों के भुगतान के तौर पर दिया जा रहा है, जबकि जल और कूड़ा प्रबंधन जैसी आवश्यक सेवाएं महंगी होती जा रही हैं।"श्री मेहरा ने आगे कहा कि संपत्ति कर में वृद्धि से किरायेदारों पर भी बोझ पड़ेगा, क्योंकि मकान मालिक अतिरिक्त लागत का भार उन पर डाल सकते हैं। इसका प्रभाव उन गृहस्वामियों पर भी पड़ेगा जो पहले से ही आवास ऋण की मासिक किस्तों का भुगतान कर रहे हैं।

उन्होंने राज्य आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए दावा किया कि राज्य में प्रति व्यक्ति कर बढ़कर लगभग 45,000 रुपये प्रति वर्ष हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम व्यक्ति को राज्य के खर्च से आनुपातिक रूप से लाभ नहीं मिलता है।

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